2027 में सपा जीतेगी, CM बनेंगे अखिलेश यादव? समीकरण समझिए

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2024 लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के आधार पर समाजवादी पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव में सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार बनकर उभरी है।

Akhilesh Yadav

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव।

उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। एक दशक से BJP के दबदबे वाले इस राज्य में समाजवादी पार्टी ने 37 लोकसभा सीटें जीतकर देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया। कांग्रेस को 6 सीटें मिलीं और इंडिया गठबंधन का कुल आंकड़ा 43 सीटों तक पहुंच गया।

विधानसभा क्षेत्रों के हिसाब से देखें तो यह गठबंधन प्रदेश की 403 सीटों में से 230 से अधिक सीटों पर आगे रहा, जो बहुमत के 202 के आंकड़े से 28 सीटें ज्यादा है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सपा समर्थक और राजनीतिक विश्लेषक 2027 विधानसभा चुनाव में पार्टी की सत्ता में वापसी की संभावना जता रहे हैं।

वोट शेयर में लगातार बढ़त, BSP का घटता जनाधार?

सपा का वोट प्रतिशत 2017 में 21.8% था, जो 2022 में बढ़कर 32.06% हो गया। इस दौरान पार्टी की सीटें 47 से बढ़कर 111 हो गईं। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा का वोट शेयर 33.59% रहा और कांग्रेस के साथ मिलाकर गठबंधन का कुल वोट शेयर 43.52% तक पहुंच गया।

इसके उलट सत्ताधारी BJP का वोट शेयर 2019 के 49.98% से गिरकर 2024 में 41.37% पर आ गया। दोनों प्रमुख गठबंधनों के बीच वोट शेयर का अंतर सिर्फ 0.17% रह गया है।

BSP का जनाधार भी लगातार सिकुड़ रहा है। पार्टी का वोट प्रतिशत 2019 में 19.4% था, जो 2022 में 12.88% और 2024 में घटकर 9.39% रह गया। पार्टी को एक भी लोकसभा सीट नहीं मिली। सीएसडीएस-लोकनीति के आंकड़ों के अनुसार 2024 में गैर-जाटव दलितों का 30% से अधिक वोट सपा-कांग्रेस गठबंधन को मिला।

PDA फॉर्मूले से सामाजिक समीकरण में बदलाव

अखिलेश यादव ने 2024 में पार्टी की मुस्लिम-यादव केंद्रित छवि बदलने की कोशिश की। पार्टी ने सिर्फ 5 यादव उम्मीदवारों को टिकट दिया, जबकि कुर्मी, मौर्य, शाक्य, सैनी, निषाद, बिंद और पाल जैसी गैर-यादव ओबीसी जातियों को बड़ी हिस्सेदारी दी गई।

फूलपुर, फैजाबाद, बस्ती, लालगंज और घोसी जैसी कुर्मी-मौर्य बहुल सीटों पर सपा को जीत मिली। पार्टी ने माता प्रसाद पांडेय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाकर सवर्ण मतदाताओं को भी PDA फॉर्मूले से जोड़ने का संदेश दिया। फैजाबाद सीट से दलित नेता अवधेश प्रसाद की जीत को भी पार्टी की बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।

बेरोजगारी और किसान मुद्दों पर घिरी सरकार

प्रदेश में पुलिस भर्ती, आरओ-एआरओ और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं से युवाओं में नाराजगी रही है। अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर आंदोलन चलाया। पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में अग्निवीर योजना को लेकर भी युवाओं में असंतोष देखा गया, जिसे सपा ने स्थायी रोजगार के वादे से भुनाने की कोशिश की।

आवारा पशुओं की समस्या, खाद-बीज की किल्लत और बढ़ते बिजली बिल जैसे मुद्दे भी ग्रामीण इलाकों में BJP के खिलाफ असंतोष की वजह बताए जा रहे हैं।

सपा-कांग्रेस गठबंधन में बेहतर तालमेल

2017 के मुकाबले 2024 में सपा-कांग्रेस गठबंधन का तालमेल ज्यादा मजबूत रहा। राहुल गांधी और अखिलेश यादव की साझा रैलियों ने कार्यकर्ताओं को जोड़ा। मुस्लिम वोट गठबंधन के साथ लामबंद हुआ, वहीं सहारनपुर, अमरोहा से लेकर अवध और पूर्वांचल तक कांग्रेस का परंपरागत सवर्ण और दलित आधार भी सपा उम्मीदवारों के पक्ष में गया।

अखिलेश यादव ने 24 सितंबर को पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत करते हुए हर बूथ पर 27 हजार अतिरिक्त वोट जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। मतदाता सूची से PDA समर्थकों के नाम कटने की आशंका के बीच पार्टी ने फॉर्म 6 और फॉर्म 7 की निगरानी के लिए तकनीकी और कानूनी सेल भी सक्रिय किया है।

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