अभिनव पांडेय ट्रोल क्यों हुए, न्यूजपिंच ने ऐसा क्या किया है?

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झारखंड पेपर लीक की कवरेज पर पक्षपात के आरोपों से घिरे न्यूज पिंच के अभिनव पांडे खुद को तटस्थ बताते हैं और आरोपों को खारिज करते हैं।

Abhinav Pandey News Pinch

अभिनव पांडेय न्यूज पिंच के संपादक हैं।

डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म न्यूज पिंच के संस्थापक अभिनव पांडे सोशल मीडिया पर निशाने पर हैं। आलोचकों का आरोप है कि उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों की कवरेज में केंद्र सरकार पर तीखे सवाल उठाए, लेकिन झारखंड में पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलन पर उनका रुख नरम रहा। यह बहस अगस्त 2026 में शुरू हुई थी। 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में हुई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की तिरंगा यात्रा के बाद यह फिर तेज हो गई।

अभिनव पांडे और न्यूज पिंच का कहना है कि वे किसी एक पाले में नहीं हैं। अभिनव ने 16 अक्टूबर को X पर लिखा कि कुछ लोग प्रदर्शनों में पत्रकारों को काम करने से रोकते हैं और फिर खुद को आम प्रदर्शनकारी बताते हैं। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह लेख बताता है कि विवाद क्या है, किसने क्या आरोप लगाए और अभिनव पांडे ने क्या कहा।

कौन हैं अभिनव पांडे और क्या है न्यूज पिंच

अभिनव पांडे हिंदी डिजिटल पत्रकार हैं। इससे पहले वे एबीपी न्यूज और द लल्लनटॉप में काम कर चुके हैं। उन्होंने 15 अगस्त 2025 को अपना डिजिटल प्लेटफॉर्म द न्यूज पिंच शुरू किया। यह यूट्यूब और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चलता है। प्लेटफॉर्म ग्राउंड रिपोर्टिंग का दावा करता है। चैनल की पहचान जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शनों की कवरेज से बनी।

इस साल CJP की अगुवाई में जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया था। न्यूज पिंच ने इन प्रदर्शनों को बड़े पैमाने पर कवर किया था।

झारखंड कवरेज पर क्या हैं आरोप

अगस्त 2026 में रांची में हजारों छात्र JPSC सिविल सेवा और JSSC-CGL परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक और OMR शीट से छेड़छाड़ के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। ऑपइंडिया ने 4 अगस्त को एक रिपोर्ट छापी। इसमें आरोप लगाया गया कि अभिनव पांडे जंतर-मंतर पर जितने मुखर थे, झारखंड में उतने नहीं दिखे। रिपोर्ट का शीर्षक था, दिल्ली में गरम, झारखंड छात्र आंदोलन में नरम।

ऑपइंडिया दक्षिणपंथी झुकाव वाला पोर्टल है और खुद को खबरों का राइट एंगल बताता है। रिपोर्ट में कहा गया कि न्यूज पिंच ने NEET विरोध के दौरान धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उलटी गिनती जैसे कैप्शन वाले रील डाले। इसके उलट झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार से इस्तीफे की मांग जैसा कोई अभियान नहीं दिखा।

रिपोर्ट में अभिनव के 2 अगस्त के एक ट्वीट का जिक्र है। इसमें उन्होंने लिखा था कि हेमंत सोरेन सरकार जंतर-मंतर से सबक ले रही है और अब तक बल प्रयोग से मना किया है। ट्वीट में उन्होंने भर्ती गड़बड़ी में 11 गिरफ्तारियों, JPSC अध्यक्ष के इस्तीफे, 14वीं JPSC परीक्षा के टलने और मुख्य परीक्षा रद्द होने की जानकारी दी।

ट्वीट में और क्या लिखा था

आलोचना के बीच यह भी दर्ज है कि उसी ट्वीट श्रृंखला में अभिनव ने सरकार से सवाल भी पूछे। उन्होंने लिखा कि छात्र पूरे मामले की CBI जांच मांग रहे हैं, जबकि फिलहाल CID जांच कर रही है। उन्होंने पूछा कि भर्ती प्रणाली पर भरोसा बहाल करने के लिए हेमंत सोरेन CBI जांच की सिफारिश क्यों नहीं कर रहे। उन्होंने यह भी पूछा कि राज्य में कोई भी भर्ती बिना विवाद के पूरी क्यों नहीं हो पाती।

उन्होंने यह जानकारी भी दी कि जिस छात्र का OMR लीक हुआ, वह AJSU नेता का बेटा है। AJSU NDA का घटक दल है। यानी ट्वीट में केवल राज्य सरकार की कार्रवाई नहीं, बल्कि सवाल और एक NDA सहयोगी से जुड़ा तथ्य भी था। ऑपइंडिया की रिपोर्ट में इन्हें संतुलन बनाने की कोशिश बताया गया।

न्यूज पिंच के सह-संस्थापक सौरभ त्रिपाठी ने भी इसी दिन एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने अखिलेश यादव और एक अखबार के संपादकों को टैग करते हुए छात्रों की आवाज उठाने की बात कही।

रांची में नारेबाजी

ऑपइंडिया की अंग्रेजी रिपोर्ट के मुताबिक रांची में पत्रकार विनायक देव त्रिवेदी की ऑन-ग्राउंड कवरेज में दिखा कि कुछ प्रदर्शनकारी न्यूज पिंच और अभिनव पांडे पर नाराज थे। उन्होंने सोरेन मीडिया, सरकार का मीडिया और गो बैक न्यूज पिंच जैसे नारे लगाए।

रिपोर्ट के शीर्षक में यह भी कहा गया कि प्रदर्शनकारियों ने अभिनव पर सोरेन सरकार से 1 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया। यह आरोप सिर्फ नारेबाजी और दावे के स्तर पर है। इसके पक्ष में अब तक कोई दस्तावेज या सबूत सामने नहीं आया है। कोई आधिकारिक जांच भी सार्वजनिक नहीं हुई है। अभिनव पांडे की ओर से इस खास आरोप पर अलग से प्रतिक्रिया हमें नहीं मिली।

16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में क्या हुआ

16 अक्टूबर को CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली के कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में शाम 5 बजे तिरंगा यात्रा का ऐलान किया था। दिल्ली पुलिस ने सख्ती बढ़ाई और ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की। आजतक की लाइव रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने शाम को कनॉट प्लेस से प्रदर्शनकारियों को हटाया और दिपके समेत करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया।

इसी दौरान सोशल मीडिया पर ऐसे दावे चले कि कवरेज कर रहे अभिनव पांडे को कुछ लोगों ने घेरकर पक्षपात के आरोप लगाए और नारेबाजी की। न्यूज पिंच ने इन लोगों को खुद को प्रदर्शनकारी बताने वाला गुट कहा। इस घटना के वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि हम नहीं कर सके।

अभिनव ने उसी दिन X पर लिखा कि बाजार में एक नई स्क्रिप्ट आई है, जिसमें प्रदर्शन में लोगों को भेजकर पत्रकारों को रोका जाता है और फिर जनता में यह माहौल बनाया जाता है कि आम लोग ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने लिखा कि सच को परेशान किया जा सकता है, दबाया नहीं जा सकता। भड़ास4मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शन में लोगों को योजनाबद्ध तरीके से भेजे जाने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह भी तय नहीं है कि घटनाएं खुद हुईं या किसी संगठित योजना का हिस्सा थीं।

अभिनव पांडे और न्यूज पिंच का पक्ष

अभिनव पांडे का कहना है कि वे दोनों तरफ के अतिवाद के खिलाफ हैं और सही को सही और गलत को गलत कहते हैं। उनके मुताबिक उन्हें एक तरफ से लेफ्ट विचारधारा के लोगों ने ट्रोल किया, तो दूसरी तरफ से राइट विंग के लोगों ने हूट किया। न्यूज पिंच ने भी प्रदर्शन स्थलों पर पत्रकारों को घेरने और उनकी रिपोर्टिंग में बाधा डालने के आरोप अपनी रिपोर्टों में उठाए हैं।

आलोचकों का तर्क अलग है। उनका कहना है कि जो प्लेटफॉर्म दूसरे पत्रकारों को गोदी मीडिया कहता रहा, उसी की कवरेज पर अब पक्षपात के सवाल उठ रहे हैं। ऑपइंडिया की रिपोर्ट में भी सौरभ त्रिपाठी के उस रील का जिक्र है जिसमें दूसरे पत्रकारों को गोदी मीडिया कहा गया था।

क्यों हो रही है ट्रोलिंग

पूरे विवाद में कुछ बातें साफ दिखती हैं। पहली, आरोप चुनिंदा आक्रोश के हैं। आलोचकों का कहना है कि केंद्र सरकार से सवाल सख्त रहे, जबकि विपक्ष शासित राज्य के मामले में टोन नरम रहा। जवाब में समर्थक कहते हैं कि अभिनव ने झारखंड पर भी सवाल पूछे और CBI जांच की मांग रखी।

दूसरी, विवाद राजनीतिक ध्रुवीकरण से जुड़ा है। एक पक्ष उन्हें विपक्ष की ओर झुका बताता है। दूसरा पक्ष उन्हें सरकार का मीडिया कहता है। दोनों ओर से आरोप लगे हैं।

तीसरी, डिजिटल पत्रकारिता में प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों से टकराव की घटनाएं बढ़ी हैं। जंतर-मंतर पर पत्रकारों की हिरासत का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। इस माहौल में किसी पत्रकार पर भीड़ का गुस्सा निकलना बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है।

अब तक जो पुष्ट है, वह इतना है कि अभिनव पांडे की झारखंड पर कवरेज की तुलना जंतर-मंतर वाली कवरेज से की जा रही है, रांची में उनके खिलाफ नारे लगे और 16 अक्टूबर को उन्होंने प्रदर्शनों में पत्रकारों को रोके जाने पर ट्वीट किया। पैसे लेने के आरोप जैसे दावे साबित नहीं हुए हैं।

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