ओम प्रकाश राजभर तय करेंगे कौन होगा यूपी का मुख्यमंत्री?

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सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने 2027 चुनाव से पहले 35 से 40 सीटें और डिप्टी सीएम पद मांगा है।

OM Prakash Rajbhar

सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर।

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सुभासपा प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर की सियासी सक्रियता बढ़ गई है। उनकी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने BJP से गठबंधन में 35 से 40 सीटों की मांग की है, साथ ही राजभर के लिए डिप्टी सीएम पद भी मांगा गया है।

इसी बीच राजभर ने देवरिया में एक रैली में यह भी कहा कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश चार हिस्सों में बंटेगा और अगर पूर्वांचल अलग राज्य बना तो वहां का मुख्यमंत्री राजभर समाज से ही बनेगा। इन बयानों के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या वे यूपी की सियासत में किंगमेकर जैसी भूमिका निभा सकते हैं।

राजभर की मौजूदा राजनीतिक स्थिति

ओम प्रकाश राजभर फिलहाल योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और ज़हूराबाद सीट से विधायक हैं। 2022 चुनाव में सपा गठबंधन में उनकी पार्टी ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और 6 सीटें जीती थीं। बाद में वे BJP गठबंधन में शामिल हो गए।

सीटों और डिप्टी सीएम पद की मांग

2027 चुनाव को देखते हुए सुभासपा ने BJP से 35 से 40 सीटों की मांग रखी है। साथ ही पार्टी की ओर से राजभर के लिए डिप्टी मुख्यमंत्री पद की भी मांग की गई है। इसे राजनीतिक हलकों में प्रेशर पॉलिटिक्स के तौर पर देखा जा रहा है।

पूर्वांचल राज्य वाला बयान

देवरिया की एक रैली में राजभर ने दोबारा उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में बांटने की पुरानी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि अगर पूर्वांचल अलग राज्य बना तो वहां का पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज का बेटा होगा। हालांकि इस दिशा में अभी तक कोई प्रशासनिक या सरकारी फैसला नहीं लिया गया है, यह पूरी तरह राजभर का राजनीतिक बयान है।

BJP से नाराजगी के संकेत भी

कुछ समय पहले राजभर के एक बयान से यह अटकलें भी तेज हुई थीं कि वे BJP गठबंधन से अलग हो सकते हैं। हालांकि पार्टी की ओर से यह भी दोहराया गया है कि सुभासपा 2027 का चुनाव BJP के साथ मिलकर ही लड़ेगी।

क्या वे किंगमेकर बन सकते हैं

राजभर समाज और पूर्वांचल के कुछ इलाकों में सुभासपा का जनाधार माना जाता है। यूपी में अगर आगे भी गठबंधन की राजनीति चलती रही, तो छोटे दलों की सीटें नतीजों में अहम भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि राजभर किंगमेकर की भूमिका में आएंगे या नहीं, क्योंकि यह चुनाव नतीजों, सीटों की संख्या और गठबंधन की स्थिति पर निर्भर करेगा। अभी तक इस बारे में कोई निश्चित तस्वीर सामने नहीं है।

कौन हैं ओम प्रकाश राजभर
ओम प्रकाश राजभर का जन्म 15 सितंबर 1962 को वाराणसी में सन्नू राजभर के घर हुआ। उन्होंने 1983 में वाराणसी के बड़ागांव स्थित बलदेव डिग्री कॉलेज से स्नातक किया। पेशे से वे राजनेता और किसान हैं। उनका विवाह 26 अप्रैल 1979 को ताराणी से हुआ और उनके दो बेटे व दो बेटियां हैं।

राजनीतिक सफर की शुरुआत
राजभर ने अपनी राजनीतिक यात्रा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से शुरू की थी और वाराणसी में पार्टी के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने कोलासला विधानसभा सीट से 1991 और 1996 में बसपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार तीसरे स्थान पर रहे। 1991 में उन्हें 18,421 वोट और 1996 में 32,777 वोट मिले थे। 2002 में बसपा से टिकट न मिलने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी।

सुभासपा की स्थापना और विधायक बनना
इसके बाद राजभर ने 27 अक्टूबर 2002 को अपनी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) बनाई, जिसके वे तभी से अध्यक्ष हैं। वे 11 मार्च 2017 से ज़हूराबाद सीट से विधायक हैं, जहां उन्होंने पूर्व विधायक सैयदा शादाब फातिमा की जगह ली।

पहला कैबिनेट कार्यकाल और बर्खास्तगी
19 मार्च 2017 को राजभर योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांगजन विकास विभाग के मंत्री बनाए गए। हालांकि 20 मई 2019 को गठबंधन विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया गया। उनके बाद अनिल राजभर को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।

सपा से गठबंधन और 2022 चुनाव
अक्टूबर 2021 में राजभर ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन करेगी। इस गठबंधन में सुभासपा ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और 6 सीटें जीतीं।

दोबारा कैबिनेट मंत्री
मार्च 2024 में राजभर उन चार मंत्रियों में शामिल थे जिन्हें उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में फिर से शामिल किया गया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में राजभवन में उन्हें शपथ दिलाई। वर्तमान में वे पंचायती राज, अल्पसंख्यक कल्याण तथा हज एवं वक्फ मंत्रालय संभाल रहे हैं।

विचार और बयान
2022 में ‘द वायर’ को दिए एक इंटरव्यू में राजभर ने कहा था कि वे खुद को हिंदू नहीं मानते और एनडीए में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने सवाल उठाया था कि राम मंदिर के निर्माण से गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों की शिक्षा को क्या लाभ मिलेगा, और भाजपा से मंदिरों के बजाय स्कूल-शिक्षा पर ज्यादा ध्यान देने को कहा था।

चंद्रयान-3 पर विवादित बयान
2023 में चंद्रयान-3 की चांद पर सफल लैंडिंग पर टिप्पणी मांगे जाने पर राजभर ने भारतीय वैज्ञानिकों की मेहनत और उपलब्धि की सराहना की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अगले दिन वैज्ञानिकों के धरती पर सुरक्षित लौटने पर पूरे देश को उनका स्वागत करना चाहिए। गौरतलब है कि चंद्रयान-3 मानवरहित मिशन था और इसकी धरती पर वापसी की कोई योजना नहीं थी, जिसके चलते उनका यह बयान चर्चा और आलोचना का विषय बना।

कितने दमदार हैं ओम प्रकाश राजभर?
ओम प्रकाश राजभर उत्तर प्रदेश की पिछड़ी जातियों की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा माने जाते हैं। बसपा से अलग होने के बाद उन्होंने 2002 में अपनी अलग पार्टी बनाकर पूर्वांचल क्षेत्र में राजभर समुदाय और अन्य पिछड़े वर्गों के बीच अपना आधार तैयार किया। भाजपा और सपा दोनों के साथ अलग-अलग समय पर गठबंधन कर चुके राजभर की पार्टी सीमित सीटों के बावजूद यूपी की गठबंधन राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।

सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा में ज़हूराबाद सीट से विधायक हैं। वे मार्च 2024 से योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और उनके पास पंचायती राज, अल्पसंख्यक कल्याण तथा हज एवं वक्फ विभाग की जिम्मेदारी है।

उन्हें राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राजभवन में शपथ दिलाई थी। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। यह राजभर का दूसरा कैबिनेट कार्यकाल है, इससे पहले वे 2017 में भी मंत्री रह चुके हैं।

जन्म और शुरुआती जीवन

ओम प्रकाश राजभर का जन्म 15 सितंबर 1962 को वाराणसी में सन्नू राजभर के घर हुआ। उन्होंने 1983 में वाराणसी के बड़ागांव स्थित बलदेव डिग्री कॉलेज से पढ़ाई पूरी की। पेशे से वे किसान भी हैं। उनका विवाह 26 अप्रैल 1979 को ताराणी से हुआ और उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं।

राजनीति में शुरुआत

राजभर ने अपना राजनीतिक सफर बहुजन समाज पार्टी से शुरू किया था। वे वाराणसी में पार्टी के जिलाध्यक्ष भी रहे। उन्होंने कोलासला सीट से 1991 और 1996 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार तीसरे स्थान पर रहे। 2002 में जब उन्हें टिकट नहीं मिला, तो उन्होंने पार्टी छोड़ दी।

अपनी पार्टी की शुरुआत

पार्टी छोड़ने के बाद राजभर ने 27 अक्टूबर 2002 को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी यानी सुभासपा बनाई। तभी से वे इस पार्टी के अध्यक्ष हैं। वे 11 मार्च 2017 से ज़हूराबाद सीट से विधायक हैं।

पहला मंत्री पद और बर्खास्तगी

19 मार्च 2017 को राजभर पहली बार योगी सरकार में मंत्री बने। उन्हें पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांगजन विकास विभाग दिया गया था। लेकिन 20 मई 2019 को गठबंधन विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया गया।

सपा से गठबंधन

अक्टूबर 2021 में राजभर ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ेगी। इस गठबंधन में सुभासपा ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और 6 सीटों पर जीत हासिल की।

दोबारा मंत्री बनना

मार्च 2024 में राजभर को फिर से यूपी कैबिनेट में शामिल किया गया। वे उन चार मंत्रियों में शामिल थे, जिन्हें उस दिन शपथ दिलाई गई थी।

अपने विचारों को लेकर भी चर्चा में

2022 में एक इंटरव्यू में राजभर ने कहा था कि वे खुद को हिंदू नहीं मानते और NDA में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने पूछा था कि राम मंदिर बनने से गरीब और पिछड़े बच्चों की पढ़ाई को क्या फायदा होगा। उन्होंने BJP से मंदिरों के बजाय स्कूल और शिक्षा पर ज्यादा ध्यान देने की बात कही थी।

चंद्रयान-3 पर दिया गया बयान

2023 में चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग पर प्रतिक्रिया देते हुए राजभर ने भारतीय वैज्ञानिकों की मेहनत की तारीफ की। लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि अगले दिन वैज्ञानिकों के धरती पर लौटने पर देश उनका स्वागत करे। असल में चंद्रयान-3 एक मानवरहित मिशन था और इसकी धरती पर वापसी की कोई योजना नहीं थी। इस बयान को लेकर उनकी काफी आलोचना हुई थी।

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