दुनिया के लिए खतरा हैं डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के GenZ कहां हैं?
डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल को अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अत्यधिक लेन-देन आधारित और अक्सर अनिश्चित दृष्टिकोण से चिह्नित किया गया है। आलोचकों का तर्क है कि यह अल्पकालिक अमेरिकी लाभ को दीर्घकालिक गठबंधनों और स्थिरता से ऊपर रखता है। निरंतर साझेदारियों का निर्माण करने के बजाय, उनकी सरकार ने टैरिफ, सार्वजनिक दावों और अचानक नीति परिवर्तनों को लीवरेज के रूप में इस्तेमाल किया है, जिससे सहयोगी और विरोधी दोनों देशों में अनिश्चितता पैदा हुई है। यह शैली संयुक्त राज्य अमेरिका को एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में विश्वास को कमजोर करती है, जिससे भारत जैसे देशों को चीन और रूस जैसे प्रतिद्वंद्वियों के साथ दांव लगाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
भारत के खिलाफ आर्थिक युद्ध
ट्रंप की आक्रामक टैरिफ व्यवस्था ने भारत को विशेष रूप से प्रभावित किया है, जिसमें कई वस्तुओं पर 50% तक शुल्क लगाया गया है, जिसमें रूसी तेल की खरीदारी से जुड़े अतिरिक्त दंड भी शामिल हैं। “अमेरिका फर्स्ट” की व्यापक रणनीति का हिस्सा ये उपाय भारत के निर्यात को बाधित कर चुके हैं, रत्न-आभूषण, फार्मास्यूटिकल्स जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को प्रभावित किया है और भारत की आर्थिक गति को धीमा कर दिया है—ठीक उसी समय जब भारत वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने का लक्ष्य रखता है। भारत की रणनीतिक महत्व के बावजूद इसे निशाना बनाकर ट्रंप ने द्विपक्षीय व्यापार संबंध की कमजोरियों को उजागर किया है और नई दिल्ली को अमेरिकी ऊर्जा आयात बढ़ाने जैसे रियायतें देने के लिए मजबूर किया है, जिससे आर्थिक परस्पर-निर्भरता को हथियार बनाया गया है।
रणनीतिक साझेदारी पर दबाव
दशकों से चीन का मुकाबला करने के लिए विकसित की गई अमेरिका-भारत रणनीतिक निकटता ट्रंप के कार्यकाल में क्षतिग्रस्त हुई है। “इंडो-पैसिफिक” शब्दावली छोड़ने, पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने और भारत-पाकिस्तान तनाव कम करने का श्रेय लेने (जिसका भारतीय अधिकारी खंडन करते हैं) जैसे कदमों ने नई दिल्ली को नाराज किया है। H-1B वीजा पर प्रतिबंधों ने भारतीय प्रतिभा और आईटी कंपनियों को नुकसान पहुंचाया है, जबकि पाकिस्तान के प्रति दिखाई गई पक्षपातपूर्ण नीति और संभावित अमेरिका-चीन “G2” व्यवस्था ने भारत को किनारे करने की आशंका बढ़ा दी है। भारत में जनमत बदला है, ट्रंप और अमेरिका में विश्वास घटा है, जिससे भारत बहु-संरेखण (मल्टी-अलाइनमेंट) की ओर बढ़ा है, जिसमें चीन के साथ अधिक निकटता शामिल है।
वैश्विक अस्थिरता और व्यवधान
वैश्विक मंच पर ट्रंप की नीतियों ने व्यापक टैरिफ के माध्यम से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बिगाड़कर, सैन्य हस्तक्षेप (जैसे ईरान से संबंधित) और गठबंधनों को अस्थिर करने की इच्छा से अस्थिरता को बढ़ावा दिया है। उनका दृष्टिकोण बहुपक्षीय ढांचों को कमजोर करता है, संशोधनवादी शक्तियों को प्रोत्साहित करता है और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचाने वाले प्रतिशोधी उपायों को जन्म देता है। भारत के लिए इसका मतलब ऊर्जा लागत में वृद्धि, आपूर्ति श्रृंखला जोखिम और पड़ोस में कम अनुमानित सुरक्षा वातावरण है। आलोचक मानते हैं कि यह “माइट-मेक्स-राइट” लेन-देनवाद नियम-आधारित व्यवस्था को नष्ट करता है, जिससे प्रतिस्पर्धी ब्लॉकों में विखंडन तेज हो सकता है और जलवायु या प्रौद्योगिकी शासन जैसे साझा चुनौतियों का सामूहिक समाधान कमजोर हो सकता है।
यह व्यापक खतरा क्यों है?
ट्रंप का नेतृत्व आर्थिक जबरदस्ती को अल्पकालिक राष्ट्रवाद के साथ जोड़कर जोखिमों को बढ़ाता है, जिससे भारत जैसे देशों के लिए प्रौद्योगिकी, रक्षा और बाजारों पर निर्भर दीर्घकालिक योजना कठिन हो जाती है। कुछ सहयोग (जैसे रक्षा ढांचे या महत्वपूर्ण खनिजों में) जारी रहने के बावजूद, समग्र पैटर्न एक ऐसे साझेदार का सुझाव देता है जो जल्दी ही दंडात्मक हो सकता है। दुनिया के लिए यह अधिक अराजक व्यवस्था को बढ़ावा देता है जहां शक्ति खेल कूटनीति पर हावी हो जाते हैं, जिससे दक्षिण एशिया से मध्य पूर्व तक गलत अनुमानों का खतरा बढ़ जाता है।
ट्रंप की पारस्परिकता पर जोर घरेलू दर्शकों को आकर्षित करता है, इसके क्रियान्वयन ने भारत की विकास यात्रा के लिए ठोस नुकसान पहुंचाए हैं और वैश्विक अनिश्चितताओं को बढ़ाया है। एक आलोचनात्मक दृष्टि इसे चतुर सौदेबाजी के बजाय विघटनकारी एकपक्षीयवाद मानती है, जो समृद्धि और सुरक्षा के लिए आवश्यक सहयोगी ढांचों को खतरे में डालता है। संतुलित साझेदारी संभव है, लेकिन इसमें इन अंतर्निहित अस्थिरताओं से निपटना आवश्यक है।
अमेरिका के जेन Z ट्रंप के खिलाफ क्यों नहीं बड़े पैमाने पर उतरे?
अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ कोई बड़ी क्रांति या व्यापक विद्रोह नहीं कर पाए, हालांकि उनकी असंतोष की आवाजें मौजूद हैं। यह कोई एक कारण नहीं, बल्कि कई सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारकों का मिश्रण है।
आर्थिक निराशा और ट्रंप की अपील
2024 चुनाव में जेन Z, खासकर युवा पुरुषों ने ट्रंप की ओर काफी झुकाव दिखाया। महंगाई, हाउसिंग की बढ़ती कीमतें, नौकरियां और रहन-सहन की लागत उनके लिए सबसे बड़े मुद्दे थे। बाइडेन-हैरिस प्रशासन के दौरान अर्थव्यवस्था की स्थिति से वे थक चुके थे। ट्रंप ने सस्ती गैस, किराने का सामान और “अमेरिकन ड्रीम” लौटाने का वादा किया, जो कई युवाओं (खासकर गैर-कॉलेज युवा पुरुषों) को आकर्षित कर गया। नतीजतन, युवा मतदाताओं में ट्रंप को समर्थन बढ़ा—युवा पुरुषों में उन्होंने हैरिस से बेहतर प्रदर्शन किया। कई युवा “एंटी-एस्टेब्लिशमेंट” भावना से प्रभावित थे और डेमोक्रेट्स को पुरानी व्यवस्था का हिस्सा मानते थे।
जेंडर गैप और सांस्कृतिक विभाजन
जेन Z में बड़ा लिंग विभाजन दिखा। युवा महिलाएं ज्यादातर डेमोक्रेट्स के साथ रहीं (गर्भपात अधिकार, सामाजिक मुद्दों पर), लेकिन युवा पुरुषों ने ट्रंप की ओर रुझान दिखाया। “मैनोस्फियर” (Joe Rogan जैसे प्रभाव), आर्थिक असुरक्षा और “पुरुषों को पीछे छोड़ दिए जाने” की भावना ने इसमें भूमिका निभाई। कई युवा पुरुष ट्रंप को “सिस्टम को तोड़ने वाला” मानते थे।
ट्रंप के बाद असंतोष बढ़ा, लेकिन बड़े पैमाने पर विद्रोह नहीं
दूसरे कार्यकाल में ट्रंप की मंजूरी रेटिंग जेन Z में तेजी से गिरी (कई पोल में 60-70% अस्वीकृति)। अर्थव्यवस्था पर वादे पूरे न होने, ईरान-इजराइल जैसे युद्धों, महंगाई और Epstein फाइल्स जैसे मुद्दों से युवा नाराज हुए। फिर भी बड़े पैमाने पर “उठ खड़े होने” की बजाय असंतोष व्यक्तिगत स्तर पर या ऑनलाइन रहा।4. अपने संघर्ष और डिसकनेक्शन
- व्यक्तिगत चुनौतियां: मानसिक स्वास्थ्य संकट, महंगाई, छात्र ऋण, हाउसिंग—ये मुद्दे युवाओं को राजनीतिक संगठन से ज्यादा व्यक्तिगत संघर्ष में व्यस्त रखते हैं।
- कम टर्नआउट और कनेक्शन: 2024 में युवा वोटर टर्नआउट गिरा। कई युवा राजनीतिक दलों से disconnected महसूस करते हैं और “कोई भी बदलाव नहीं लाएगा” की सोच रखते हैं।
- प्रोटेस्ट में कम भागीदारी: “No Kings” जैसे प्रदर्शनों में जेन Z की भागीदारी बूमर्स से कम रही। छात्रों की संख्या नगण्य थी।
5. ट्रंप समर्थक जेन Z का एक हिस्सासभी जेन Z ट्रंप विरोधी नहीं हैं। कुछ युवा (खासकर पुरुष) “नई ट्रेडिशनलिज्म” या आर्थिक राष्ट्रवाद से जुड़े हैं। हालांकि कुल मिलाकर जेन Z अब डेमोक्रेट्स की ओर झुक रहा है, लेकिन यह “उठ खड़े होने” जितना तीव्र नहीं है