किस किस का इस्तीफा लोगे अभिजीत दीपके?
अभिजीत दीपके देश की व्यवस्था में कैसा बदलाव चाहते हैं, देश समाज गया है?
मुंबई के शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन दिनभर सुर्खियों में रहा। संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में समर्थकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू किया। मुंबई पुलिस और BMC ने इस कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी थी और वैकल्पिक जगह का सुझाव दिया था, लेकिन इसके बावजूद CJP ने पार्क के गेट नंबर 6 के पास प्रदर्शन किया।
यह आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ है। कुछ महीनों में ही एक सोशल मीडिया मीम से उठी यह पार्टी देश की राजनीति में एक नया और अनोखा चेहरा बन गई है।
कैसे बनी कॉकरोच जनता पार्टी
CJP की शुरुआत की कहानी भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के एक बयान से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने देश के युवाओं के संदर्भ में कॉकरोच का जिक्र किया था। बाद में कोर्ट की तरफ से स्पष्ट किया गया कि यह टिप्पणी आम बेरोजगार युवाओं के लिए नहीं, बल्कि फर्जी डिग्री वालों के लिए थी। लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर यह बात फैल चुकी थी।
इसी के बाद 16 मई 2026 को राजनीतिक संचार रणनीतिकार अभिजीत दीपके ने व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए X पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक अभियान शुरू किया। पार्टी का नारा रखा गया, आलसियों और बेरोजगारों की आवाज। देखते ही देखते यह डिजिटल अभियान युवाओं की नाराजगी और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग का प्रतीक बन गया। NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों के विरोध में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद यह संगठन राष्ट्रीय चर्चा में आ गया।
कौन हैं अभिजीत दीपके
अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (पहले औरंगाबाद) से आते हैं। उनका जन्म 1995 में हुआ था। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता में स्नातक की पढ़ाई की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए, जहां बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की।
2020 से 2023 के बीच वे आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम के साथ जुड़े रहे और दिल्ली चुनावों के दौरान युवा मतदाताओं के लिए डिजिटल अभियान चलाए। 2023 में वे आगे की पढ़ाई के लिए पार्टी से अलग हो गए थे। दीपके अब CJP को उन युवाओं के लिए एक मंच बताते हैं जो व्यवस्था से नाराज हैं। करीबियों के मुताबिक उनकी खासियत कठिन डेटा और राजनीतिक घटनाक्रम को सरल, मारक और व्यंग्यात्मक मीम्स में बदलकर लोगों तक पहुंचाना रही है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और दीपके का दावा
25 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के बीच तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद दीपके ने कहा था कि यह इस्तीफा इस बात का सबूत है कि निडर रहने पर किसी का भी इस्तीफा लिया जा सकता है और आगे भी ऐसा किया जाएगा।
इसके बाद दीपके का एक मुहावरा ‘किसका इस्तीफा लोगे’ आंदोलन की पहचान बन गया। एक कार्यक्रम में समर्थकों के बीच जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेकर यही सवाल पूछा, तो इससे वहां मौजूद लोगों में नाराजगी फैल गई और दीपके को उलटे पांव लौटना पड़ा।
बालाघाट का व्यंग्यात्मक पत्र
सितंबर 2026 में मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के मामले में भी दीपके का नाम चर्चा में आया। प्रभावित गांवों का दौरा करने के बाद उन्होंने X पर एक व्यंग्यात्मक पत्र पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने की बात लिखी।
13 अगस्त 2026 की तारीख वाले इस पत्र में दीपके ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल को संबोधित करते हुए 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत का हवाला दिया और स्वास्थ्य सुविधाओं, मुआवजे, पेयजल और स्कूलों की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने इसमें सागर की जहरीली शराब त्रासदी का भी जिक्र किया, जिसमें 16 लोगों की मौत हुई थी। यह पूरा पत्र मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार पर निशाना साधने के लिए तैयार किया गया व्यंग्य था, क्योंकि दीपके वास्तव में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं हैं।
मुंबई में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ताजा आंदोलन
2 अक्टूबर को CJP ने गांधी जयंती के मौके पर मुंबई में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर प्रदर्शन किया। इसी दिन दिल्ली में विपक्षी दलों ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर अलग प्रदर्शन किया।
शिवाजी पार्क में प्रशासन ने भारी सुरक्षा बल तैनात किया और मुख्य रास्तों पर बड़े पैमाने पर बैरिकेडिंग की गई। कुछ स्थानीय निवासियों ने भी इस प्रदर्शन का विरोध किया और कहा कि इससे इलाके की शांति और रोजमर्रा की जिंदगी में खलल पड़ रहा है। गायक-संगीतकार विशाल ददलानी ने प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया पर समर्थन का वीडियो जारी किया और लोगों से शिवाजी पार्क पहुंचने की अपील की। अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने भी प्रदर्शन के दौरान दीपके से मुलाकात की।
CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सिद्धांत भारद्वाज ने 29 सितंबर को कहा था कि संगठन प्रदर्शन से पीछे नहीं हटेगा और यह तब तक जारी रहेगा, जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते। प्रदर्शन के दौरान CJP प्रवक्ता सौरव दास ने ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग दोहराई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फर्जी नैरेटिव नहीं चलेगा।
फिलहाल ज्ञानेश कुमार या चुनाव आयोग की ओर से इन मांगों पर कोई औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है।
आगे की रणनीति?
प्रदर्शन के बाद दीपके ने ऐलान किया कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो CJP अक्टूबर के आखिर में दोबारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा आंदोलन करेगी। संगठन पहले ही अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन करने की बात कह चुका है। एक रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा में कुल 540 सदस्य हैं, और सरकार को दोबारा झुकाना इस बार संख्या बल के लिहाज से भी मुश्किल माना जा रहा है। यह आकलन रिपोर्ट का है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।