जो परम आनंद है, वही तो प्रेमानंद है
वृंदावन के प्रेमानंद महाराज के आश्रम में शिष्य की संदिग्ध मौत की जांच जारी है। कोहली को 5 करोड़ देने का दावा खारिज हो चुका है।
बाबा प्रेमानंद।
वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज और उनका श्री हित राधा केलि कुंज आश्रम इन दिनों विवादों में हैं। 25 सितंबर 2026 को आश्रम से जुड़े 25 साल के साधक दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत हो गई थी। वे चौथी मंजिल से नीचे गिरे थे। पुलिस ने शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या की ओर इशारा करने वाला मामला बताया है। लेकिन परिवार के सवाल और पोस्टमार्टम में मिली चोटों के बाद जांच अब हर पहलू से हो रही है।
मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच चुका है। आयोग ने आगरा जोन के ADG को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। इसी बीच श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े एक न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा उर्फ फलाहारी महाराज ने दावा किया कि क्रिकेटर विराट कोहली को आश्रम बुलाने के लिए 5 करोड़ रुपये दिए गए थे। कोहली के प्रवक्ता ने इस दावे को झूठा बताया है। यह लेख बताता है कि अब तक क्या पुष्ट है, क्या सिर्फ आरोप है और प्रेमानंद महाराज कौन हैं।
25 सितंबर को क्या हुआ था
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक घटना 25 सितंबर की सुबह की है। वृंदावन के वराह घाट मार्ग पर गुरु कृपा कुंज नाम की इमारत है, जो राधा केलि कुंज ट्रस्ट से जुड़ी बताई जाती है। CCTV फुटेज के मुताबिक सुबह करीब 10:25 बजे दीपक अपने कमरे से बाहर निकले। इसके बाद वे चौथी मंजिल की छत पर पहुंचे। करीब 10:36 बजे वे नीचे गिर गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
दीपक मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। परिवार के मुताबिक वे करीब दो साल पहले वृंदावन आए थे। प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने के बाद उन्होंने रसिक दुलारी शरण नाम अपनाया।
वृंदावन के क्षेत्राधिकारी संजीव कुमार ने शुरुआती जांच के आधार पर कहा था कि CCTV फुटेज से यह आत्महत्या का मामला लगता है। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार की शिकायत के बाद पुलिस फॉरेंसिक टीम, CCTV और दीपक के साथियों से पूछताछ के जरिए हर एंगल खंगाल रही है।
पोस्टमार्टम में क्या मिला
दीपक का पोस्टमार्टम 26 सितंबर को मथुरा में हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक मौत की वजह मृत्यु से पहले लगी चोटों के कारण हुआ हेमरेजिक शॉक यानी ज्यादा खून बहने से लगा झटका है। रिपोर्टों में सिर पर गहरे घाव, खोपड़ी में बारीक दरार, पसलियों में फ्रैक्चर, फेफड़े में चोट और पैर में फ्रैक्चर का जिक्र है। आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक शरीर पर सात जगह चोटें पाई गईं।
पुलिस ने कुछ चोटों की प्रकृति को लेकर सवाल उठने की बात मानी है। मथुरा के SP सिटी ने भी एक चोट के इलाज के निशान मिलने को चौंकाने वाला बताया था और कहा था कि जांच जारी है। यहां ध्यान रखना जरूरी है कि ये चोटें कैसे लगीं, इसका आधिकारिक जवाब अभी नहीं आया है।
पुलिस कमरे से मिले सामान की फॉरेंसिक जांच करवा रही है। खून के नमूनों की टॉक्सिकोलॉजी जांच भी हो रही है, ताकि किसी नशीले पदार्थ के एंगल का पता चल सके। द सूत्र की रिपोर्ट के मुताबिक एक अन्य साधक की भूमिका भी देखी जा रही है। इसी रिपोर्ट के मुताबिक FIR की स्थिति 4 अक्टूबर तक की मीडिया रिपोर्टों में साफ नहीं थी।
परिवार के आरोप और आयोग तक पहुंचा मामला
दीपक के माता-पिता ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि दीक्षा लेने के बाद पिछले दो साल में उन्हें बेटे से मिलने या फोन पर बात करने नहीं दिया गया। परिवार का यह भी कहना है कि आश्रम के लोगों ने जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया। परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले की CBI जांच की मांग की है।
मथुरा पुलिस ने इन आरोपों को गंभीरता से लिया है। पुलिस यह भी जांच रही है कि आश्रम में शिष्यों के मोबाइल इस्तेमाल और बाहरी दुनिया से संपर्क पर क्या पाबंदियां थीं। जांच टीम परिजनों के बयान लेने की तैयारी में है।
9 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा राजपूत की शिकायत पर कदम उठाया। आयोग ने आगरा जोन के ADG को निष्पक्ष जांच और जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शिकायत में CCTV फुटेज, फॉरेंसिक सबूत और कमरे की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
राधा केलि कुंज ट्रस्ट ने घटना के नौ दिन बाद अपील जारी की। ट्रस्ट ने कहा कि महाराज जी और पूरा परिवार इस घटना से बहुत आहत है। ट्रस्ट ने साधक के परिवार के प्रति संवेदना जताई और पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही। ट्रस्ट ने लोगों से अपुष्ट जानकारी और अफवाहों से बचने की अपील भी की।
लापता मामले भी जुड़े
दीपक की मौत के बाद आश्रम से जुड़े लापता मामलों की भी चर्चा हुई। हाथरस के 17 साल के अनुज चौधरी का मामला इनमें सबसे ज्यादा चर्चित रहा। बताया गया कि अनुज ने प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी। बाद में परिवार ने उसके लापता होने की शिकायत की और आश्रम के बाहर प्रदर्शन किया।
पुलिस ने अनुज को बरसाना क्षेत्र के एक दूसरे आश्रम से बरामद कर लिया। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि वह इतने समय तक कहां रहा और परिवार से संपर्क क्यों नहीं हुआ। कुछ रिपोर्टों में कुल तीन लोगों के लापता होने का जिक्र है, लेकिन बाकी मामलों की जानकारी साफ नहीं है।
यह पहली बार नहीं है जब किसी नाबालिग के प्रेमानंद महाराज के लिए घर छोड़ने की खबर आई हो। मार्च 2026 में इंदौर से एक 15 साल के लड़के के घर से निकलने की खबर भी सामने आई थी।
कोहली को 5 करोड़ देकर बुलाने का दावा क्या है
विवाद के बीच फलाहारी महाराज के नाम से चर्चित दिनेश शर्मा ने दावा किया कि विराट कोहली को आश्रम बुलाने के लिए 5 करोड़ रुपये दिए गए थे। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने यह रकम 2023 में कोहली की पहली मुलाकात से जोड़ी। उनका आरोप था कि राजस्थान की एक कंपनी या प्रॉपर्टी से जुड़े लोगों के समूह ने यह इंतजाम किया। इसके पीछे मकसद संत की लोकप्रियता बढ़ाना बताया गया।
कोहली के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी कर इस दावे को पूरी तरह खारिज किया। बयान में कहा गया कि ये दावे झूठे, बेबुनियाद और तथ्यों के लिहाज से गलत हैं। प्रवक्ता ने कहा कि कोहली प्रेमानंद महाराज के पास अपनी गहरी आस्था और श्रद्धा के कारण जाते हैं।
आश्रम से जुड़े एक संत ने आजतक से कहा कि उनके पास इतना पैसा कहां से आएगा। उन्होंने कहा कि यहां कोई दान पेटी नहीं रखी जाती और कोई डोनेशन नहीं लिया जाता। यह आश्रम की ओर से एक संत का बयान है, ट्रस्ट का आधिकारिक वित्तीय ब्योरा नहीं।
अब तक किसी स्वतंत्र दस्तावेज या जांच में 5 करोड़ रुपये के लेन-देन की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह दावा और उसका खंडन, दोनों को अलग-अलग रखकर देखना चाहिए।
फलाहारी महाराज के और आरोप
दिनेश शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रेमानंद महाराज के लिए Z+ श्रेणी की सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि आश्रम से जुड़े एक गुट में कथित तौर पर आपराधिक पृष्ठभूमि और प्रॉपर्टी डीलिंग से जुड़े कुछ लोग शामिल हैं। उन्होंने ऐसे लोगों की संपत्तियों की जांच की मांग की।
उन्होंने यह भी दावा किया कि दीपक की मौत के बाद आश्रम में दो गुटों के बीच विवाद की स्थिति बनी है। वेबदुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक इस दावे की पुष्टि नहीं हो पाई है। फलाहारी के ये आरोप अभी सिर्फ आरोप हैं। किसी जांच एजेंसी ने इन्हें सही नहीं ठहराया है।
प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा
घटना के बाद कई दिन तक प्रेमानंद महाराज की ओर से कोई सीधा बयान नहीं आया। 8 अक्टूबर को उनके यूट्यूब चैनल भजन मार्ग पर एक सत्संग वीडियो आया। इसमें उन्होंने कहा कि निर्दोष होने के बावजूद अगर समाज में निंदा और अपमान सहना पड़े तो परेशान नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे भगवान का कड़वा प्रसाद समझकर स्वीकार करने की सलाह दी।
उन्होंने निंदा का जवाब निंदा से न देने और मुस्कुराकर सहने की बात भी कही। उन्होंने सीधे तौर पर किसी विवाद या शिष्य की मौत का जिक्र नहीं किया। एशियानेट की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि इन बातों को मौजूदा विवाद से जोड़ने का कोई स्पष्ट आधार नहीं है।
रिपोर्टों के मुताबिक कुछ दिन पहले वे केलि कुंज से करीब 20 किलोमीटर दूर यमुना पार बेलवन क्षेत्र में बने नए आश्रम यमुना विहार कुंज चले गए थे। टाइम्स नाउ नवभारत की 8 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक वे सुबह करीब पांच से साढ़े पांच बजे के बीच केलि कुंज लौट आए और भक्तों की भीड़ जुट गई।
उनकी सेहत भी चर्चा में रही है। मई 2026 में खबर आई थी कि तबीयत बिगड़ने से उनकी रात्रि पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी गई।
कौन हैं प्रेमानंद महाराज
प्रेमानंद महाराज का पूरा नाम श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज बताया जाता है। उनका बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडेय था। उपलब्ध जानकारियों के मुताबिक उनका जन्म 1969 में कानपुर क्षेत्र के सरसौल ब्लॉक के अखरी गांव में हुआ। पिता का नाम शंभू पांडेय और मां का नाम रमा देवी बताया जाता है। परिवार खेती से जुड़ा था और घर में धार्मिक माहौल था।
उनके बड़े भाई संस्कृत के विद्वान बताए जाते हैं। अनिरुद्ध को बचपन से ही भजन, कीर्तन और कथाओं में रुचि थी। वे मंदिर में बैठकर रामायण, गीता और भागवत की कथा सुनते थे। उन्होंने नरवल क्षेत्र के एक जूनियर हाईस्कूल से आठवीं तक पढ़ाई की। इसके बाद भास्करानंद विद्यालय में दाखिला लिया, लेकिन औपचारिक पढ़ाई में उनका मन कम लगा।
वे वृंदावन के रसिक संत की परंपरा से जुड़े हैं और राधावल्लभ संप्रदाय की भक्ति को मानते हैं। आश्रम की वेबसाइट उन्हें इसी परंपरा के रसिक संत के रूप में पेश करती है। उनके सत्संग का मुख्य विषय राधा नाम, समर्पण और वृंदावन धाम का आश्रय है।
कैसे बने प्रेमानंद
बताया जाता है कि करीब 13 साल की उम्र में अनिरुद्ध ने मां से कहा कि वे भगवान की खोज में घर छोड़ना चाहते हैं। परिवार ने इसे उम्र की भावुकता माना, लेकिन उनका फैसला नहीं बदला। एक दिन तड़के करीब तीन बजे वे घर से निकल गए।
घर छोड़ने के बाद वे काशी पहुंचे। कहते हैं कि वाराणसी के घाटों और मंदिरों में उन्होंने साधना की। गंगा स्नान, ध्यान, भजन और सीमित भोजन उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहे।
काशी में एक आयोजन के दौरान उन्होंने रासलीला देखी। बताया जाता है कि वे करीब एक महीने तक लगातार रासलीला देखने जाते रहे। आयोजन खत्म होने पर कलाकार वृंदावन लौटने लगे। अनिरुद्ध ने सेवा के बदले साथ ले जाने की इच्छा जताई, पर पैसे न होने के कारण दल ने उन्हें साथ नहीं लिया। कलाकारों ने उन्हें वृंदावन जाने की सलाह दी। यही सलाह उनके जीवन का मोड़ बनी।
वृंदावन पहुंचने पर उनका संपर्क राधावल्लभ संप्रदाय की भक्ति परंपरा से हुआ। उल्लेख मिलता है कि मोहित गोस्वामी से उन्हें शरणागति मंत्र की दीक्षा मिली। बाद में वे श्री गौरांगी शरण जी महाराज के सान्निध्य में आए, जिन्हें उनके बड़े गुरुजी माना जाता है। बताया जाता है कि उन्होंने करीब दस साल तक गुरु सेवा की। इसके बाद वे प्रेमानंद गोविंद शरण नाम से जाने गए।
कहां-कहां रहे और कैसे रहे
उनकी यात्रा तीन ठिकानों से जुड़ी बताई जाती है। पहला ठिकाना कानपुर के पास का अखरी गांव है, जहां उनका बचपन बीता। दूसरा ठिकाना काशी रहा, जहां उन्होंने कुछ समय साधना की। तीसरा और स्थायी ठिकाना वृंदावन है।
वृंदावन में उनकी पहचान श्री हित राधा केलि कुंज से जुड़ी है। यह आश्रम परिक्रमा मार्ग पर वराह घाट के पास रमण रेती इलाके में है। यह कोई बड़ा भव्य परिसर नहीं, बल्कि संकरी गली में बना अपेक्षाकृत साधारण आश्रम बताया जाता है।
आश्रम की वेबसाइट के मुताबिक यहां रोज सुबह 4:15 बजे से सत्संग होता है। 5:15 बजे मंगला आरती होती है। इसके बाद राधा सुधानिधि पाठ, हित चौरासी पाठ, श्रृंगार आरती और राधा नाम संकीर्तन होता है। शाम को धूप आरती, वाणी पाठ और संध्या आरती होती है।
प्रेमानंद महाराज को पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज यानी PKD की बीमारी है। यह आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें किडनी में कई सिस्ट बन जाते हैं। इसके बावजूद वे लंबे समय तक सत्संग और भक्तों से संवाद करते रहे।
लोकप्रियता कैसे बढ़ी, साम्राज्य पर क्या हैं तथ्य
प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता में सोशल मीडिया की सबसे बड़ी भूमिका रही। उनके सत्संग के छोटे वीडियो इंस्टाग्राम रील और यूट्यूब शॉर्ट्स पर खूब फैले। आश्रम का आधिकारिक यूट्यूब चैनल भजन मार्ग है। एक डेटा एनालिटिक्स वेबसाइट के मुताबिक अगस्त 2026 में इस चैनल के करीब 1.72 करोड़ सब्सक्राइबर थे और हर वीडियो पर औसतन करीब 2.35 लाख व्यू आते थे। ये आंकड़े किसी तीसरे पक्ष के हैं।
वे रोजमर्रा के सवालों के जवाब सीधी भाषा में देते हैं। प्रेम, रिश्ते, परिवार, मन की बेचैनी और असफलता उनके सत्संग के मुख्य विषय रहे हैं। यही सरल अंदाज उन्हें आम लोगों तक ले गया।
दूसरी वजह मशहूर हस्तियों की मुलाकातें रहीं। विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की 2023 की चर्चित मुलाकात के बाद उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। बाद में दोनों कई बार आश्रम गए। 2025 में वे तीन बार गए थे और 2026 में भी उनके जाने की खबरें आईं। हेमा मालिनी और ग्रेट खली जैसे नाम भी उनके भक्तों में गिने जाते हैं।
वर्ष 2016 में श्रीहित राधा केलिकुंज ट्रस्ट की स्थापना से भी उनका नाम जुड़ा है। ट्रस्ट के मुताबिक उसका मकसद धार्मिक गतिविधियों के साथ सेवा कार्यों को बढ़ावा देना है।
यहां एक बात साफ करना जरूरी है। साम्राज्य जैसा शब्द कई जगह इस्तेमाल हुआ है, लेकिन अब तक सामने आई रिपोर्टों में ट्रस्ट की संपत्ति, आय या खर्च का कोई सत्यापित आंकड़ा नहीं मिलता। आश्रम से जुड़े संत के मुताबिक वहां दान पेटी नहीं है। दूसरी तरफ फलाहारी महाराज ने जमीन और प्रॉपर्टी से जुड़े लोगों के आश्रम में शामिल होने का आरोप लगाया है, जिसकी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस विषय पर अंतिम बात तभी कही जा सकती है, जब कोई जांच या सार्वजनिक दस्तावेज सामने आए।
पहले भी बयानों पर उठे थे सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब प्रेमानंद महाराज चर्चा में आए हों। जुलाई 2025 में उनके एक सत्संग का बयान वायरल हुआ। उसमें उन्होंने कहा था कि आज के समय में सौ में से मुश्किल से दो-चार लड़कियां ही पवित्र होती हैं। इस बयान पर महिलाओं और कुछ साध्वियों ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि पुरुषों की भी उतनी ही जिम्मेदारी होती है और संतों को ऐसे बयानों से बचना चाहिए। कुछ संतों ने बयान का समर्थन भी किया था।
उसी दौर में उनकी लिव-इन रिलेशनशिप पर की गई टिप्पणी भी चर्चा में रही थी। ये विवाद बयानों से जुड़े थे। मौजूदा विवाद आश्रम की व्यवस्था, शिष्यों की सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़ा है।
अब सवाल क्यों उठ रहे हैं
मौजूदा सवालों की कुछ बड़ी वजहें हैं। पहली वजह दीपक की मौत की परिस्थितियां हैं। पुलिस शुरुआती तौर पर आत्महत्या की बात कह रही है, लेकिन पोस्टमार्टम में मिली कई चोटों ने सवाल खड़े किए हैं।
दूसरी वजह परिवार के आरोप हैं। दो साल तक बेटे से मिलने न देने और जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने के आरोप गंभीर हैं। इनकी जांच चल रही है।
तीसरी वजह नाबालिगों का दीक्षा लेकर आश्रम से जुड़ना और लापता होने के मामले हैं। इससे आश्रम के रिकॉर्ड, परिवार से संवाद और निगरानी की व्यवस्था पर बहस शुरू हुई है।
चौथी वजह आश्रम की चुप्पी रही। घटना के नौ दिन बाद ट्रस्ट का पहला बयान आया। इतने बड़े मामले में देरी ने भी सवाल बढ़ाए।
भक्तों का पक्ष अलग है। उनका कहना है कि महाराज जी को लेकर बिना जांच पूरी हुए निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं है। कई अनुयायी मानते हैं कि विवाद में आश्रम की छवि को निशाना बनाया जा रहा है।
आगे क्या
फिलहाल कई बातें साफ होनी बाकी हैं। फॉरेंसिक और टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट आना बाकी है। CCTV के सभी फुटेज की जांच पूरी होनी है। दीपक के परिवार के बयान दर्ज होने हैं। आश्रम में रहने वाले साधकों की पाबंदियों और रिकॉर्ड व्यवस्था की जांच भी होनी है। मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर ADG स्तर की जांच भी आगे बढ़ेगी।
इन सब जांचों के नतीजे आने तक अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। जांच में जो भी सामने आए, उसी के आधार पर आरोपों की सच्चाई तय होगी। तब तक आरोप, खंडन और पुष्ट तथ्य, तीनों को अलग-अलग रखकर देखना जरूरी है।