मराठा आरक्षण पर बॉम्बे हाईकोर्ट में क्या चल रहा है?
बॉम्बे हाई कोर्ट।
महाराष्ट्र के 2024 के मराठा आरक्षण कानून को दी गई चुनौती पर बॉम्बे हाईकोर्ट तीसरी बार सुनवाई करेगा। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक नई पीठ 9 अक्टूबर से याचिकाओं पर नए सिरे से सुनवाई शुरू करेगी।
नई पीठ की अध्यक्षता जस्टिस एम.एस. कर्णिक करेंगे। पिछली पीठ के सदस्य जस्टिस एन.जे. जमादार और जस्टिस एस.वी. मार्ने को इसमें भी रखा गया है।
पिछली पीठ की अगुवाई तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आर.वी. घुगे कर रहे थे। उनके कलकत्ता हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद नई पीठ बनाई गई। रिपोर्ट के अनुसार करीब 20 बैठकों में हुई अंतिम बहस अब पूरी तरह दोबारा होगी।
क्या है कानून और क्या हैं दलीलें
महाराष्ट्र राज्य सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (SEBC) अधिनियम, 2024 मराठा समुदाय को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण देता है।
याचिकाकर्ताओं ने इसे असंवैधानिक बताया है। उनका दावा है कि यह इंद्रा साहनी फैसले में सुप्रीम कोर्ट की तय 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का उल्लंघन करता है। उनका यह भी कहना है कि रिटायर्ड जस्टिस सुनील बी. शुक्रे की अध्यक्षता वाले महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (MSBCC) के विस्तारित सर्वेक्षण के अलावा नए कानून में कोई नया कानूनी आधार नहीं है।
राज्य सरकार का तर्क है कि उसने व्यापक अनुभवजन्य आंकड़ों के आधार पर “असाधारण परिस्थितियां” स्थापित कर पिछली संवैधानिक खामियां दूर कर दी हैं।
बार-बार रुकी सुनवाई
मामले की शुरुआती सुनवाई तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय, जस्टिस गिरीश एस. कुलकर्णी और जस्टिस फिरदौस पी. पूनीवाला की पीठ ने की थी। 16 अप्रैल 2024 के अंतरिम आदेश में इस पीठ ने स्पष्ट किया कि 2024 के कानून के तहत दाखिले और भर्तियां मामले के अंतिम नतीजे के अधीन रहेंगी।
याचिकाकर्ताओं की बहस पूरी होने के बाद तत्कालीन महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने राज्य की ओर से जवाब शुरू किया था। तभी मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय का दिल्ली हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के रूप में तबादला हो गया और मामला अटक गया।
इसके बाद NEET-UG और PG अभ्यर्थियों ने शैक्षणिक व्यवधान का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कीं। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अगुवाई वाली पीठ ने हाईकोर्ट को तुरंत नई पीठ गठित करने का निर्देश दिया।
इसी निर्देश पर जस्टिस घुगे, जस्टिस जमादार और जस्टिस मार्ने की पूर्ण पीठ 15 मई 2025 को गठित हुई। पीठ ने 18 जुलाई 2025 से सुनवाई शुरू की।
पीठ भंग होने तक याचिकाकर्ताओं और राज्य के महाधिवक्ता मिलिंद साठे की दलीलें 2 सितंबर तक पूरी हो चुकी थीं। MSBCC, विशेष वकील वी.ए. थोराट, संबंधित याचिकाओं और हस्तक्षेपकर्ताओं की दलीलें बाकी थीं। जस्टिस घुगे के कलकत्ता हाईकोर्ट जाने से कार्यवाही दूसरी बार रुक गई।
पिछला कानून
2024 का कानून मराठा आरक्षण के लिए राज्य सरकार का एक और विधायी प्रयास है। 2018 के SEBC कानून में शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 16 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उसे वैध ठहराया था, लेकिन आरक्षण घटाकर शिक्षा में 12 प्रतिशत और नौकरियों में 13 प्रतिशत कर दिया था।
मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 2018 का कानून पूरी तरह रद्द कर दिया। महाराष्ट्र सरकार की पुनर्विचार याचिका अप्रैल 2023 में खारिज हो गई थी।
अब सभी की नजर 9 अक्टूबर पर है, जब जस्टिस कर्णिक की अध्यक्षता वाली पीठ अंतिम बहस नए सिरे से शुरू करेगी