‘हम कॉकरोच हैं, पुलिसिया दमन से मरते नहीं हैं’
कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन।
भारत में युवाओं के गुस्से ने एक नया रूप ले लिया है। “कॉकरोच जनता पार्टी” नाम का यह आंदोलन शुरू में सोशल मीडिया पर एक मजाक के रूप में शुरू हुआ, लेकिन कुछ ही हफ्तों में यह शिक्षा व्यवस्था की खामियों, पेपर लीक और युवा बेरोजगारी के खिलाफ एक बड़ा जन आंदोलन बन गया है।
20 जुलाई 2026 को दिल्ली में हजारों युवाओं ने संसद की ओर मार्च किया, पुलिस से टकराव हुआ और पूरे देश का ध्यान इस आंदोलन पर केंद्रित हो गया। यह आंदोलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए एक अप्रत्याशित चुनौती बनकर उभरा है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं इस आंदोलन के जनक?
आंदोलन की शुरुआत 16 मई 2026 को हुई। सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने देश के बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” और “समाज के परजीवी” से कर दी। यह टिप्पणी युवाओं के आत्मसम्मान पर गहरा आघात पहुंचाने वाली साबित हुई।
अभिजीत दिपके, 30 वर्षीय युवा, जो अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से हाल ही में ग्रेजुएट हुए थे, ने इस पर सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक पोस्ट डाला। उन्होंने लिखा – “क्या होगा अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं?” यह पोस्ट वायरल हो गई।
युवाओं ने इसे अपनी पहचान बना लिया और “कॉकरोच मरते नहीं” जैसे नारे गूंजने लगे। दिपके ने जल्दी ही एक वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट्स बनाए। उन्होंने इसे “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) नाम दिया, जो सत्तारूढ़ भाजपा की पैरोडी था। शुरुआत में यह पूरी तरह ऑनलाइन था।
मीम्स, व्यंग्यात्मक वीडियो और पोस्ट के जरिए यह फैला। दो हफ्तों में इंस्टाग्राम पर 22 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स जुट गए, जो भाजपा से भी ज्यादा थे। सरकार ने अकाउंट ब्लॉक करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।चाहे आंदोलन की मांगों से सहमति हो या असहमति, युवाओं की पीड़ा को मजाक या उपहास का विषय बनाना किसी भी सभ्य समाज के लिए उचित नहीं माना जा सकता।
आंदोलन इतना व्यापक कैसे हुआ?
अभिजीत दिपके आंदोलन के मुख्य चेहरा हैं। वे राजनीतिक संचार रणनीतिकार हैं और पहले आम आदमी पार्टी के साथ काम कर चुके हैं। अमेरिका से लौटकर उन्होंने इस आंदोलन को नेतृत्व दिया। उनकी टीम में प्रवक्ता सौरव दास, आशुतोष रांका, विजेता दहिया जैसे लोग शामिल हैं। दिपके का कहना है कि यह आंदोलन उन युवाओं की आवाज है जिन्हें सिस्टम भूल गया है। उन्होंने एक व्यंग्यात्मक घोषणापत्र भी जारी किया जिसमें मुख्य न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद राज्यसभा सीट न देने, महिलाओं को 50% आरक्षण और दलबदलुओं पर 20 साल का प्रतिबंध जैसी मांगें शामिल हैं। आंदोलन खुद को “धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक, आलसी” बताता है।

सरकार की नाकामी, इस्तीफे की मांग
आंदोलन की जड़ें गहरी हैं। भारत में NEET जैसी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक हो रहे हैं। 2 मिलियन से ज्यादा छात्र सिर्फ 1.3 लाख सीटों के लिए compete करते हैं। परिवार अपनी सारी पूंजी और कर्ज लेकर कोचिंग पर खर्च करते हैं। कोटा जैसे शहरों में छात्रों पर दबाव इतना है कि कई आत्महत्या कर लेते हैं। NEET के अलावा अन्य परीक्षाओं में भी लीक हुए हैं। सरकार पर आरोप है कि वह जिम्मेदारी नहीं ले रही। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग मुख्य है। इसके अलावा 25 साल से कम उम्र के करीब 40% ग्रेजुएट बेरोजगार हैं। युवा महंगाई, नौकरियों की कमी और सिस्टम में भ्रष्टाचार से त्रस्त हैं। CJP ने इन मुद्दों को एक मंच दिया।
जंतर मंतर से संसद घेराव की तैयारी
1 जून को दिपके ने आंदोलन को सड़क पर उतारने का ऐलान किया। 6 जून 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहला बड़ा धरना हुआ। यहां शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग रखी गई। जून के अंत तक यह स्थायी धरना बन गया। छात्र कॉकरोच के कॉस्ट्यूम पहनकर प्रदर्शन कर रहे थे। सफाई अभियान भी चलाए गए। आंदोलन में मुख्य रूप से 28 साल से कम उम्र के युवा शामिल हैं, जो किसी पार्टी से सीधे जुड़े नहीं हैं।
सोनम वांगचुक की भूमिका और भूख हड़ताल
जुलाई की शुरुआत में लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर और शिक्षा कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आंदोलन का साथ दिया। उन्होंने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। उनका कहना था कि वे शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक अनशन जारी रखेंगे। 20 दिनों तक हड़ताल चलने के बाद उनकी हालत बिगड़ी। 19 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल ले जाया। उनकी पत्नी ने इसे “अवैध हिरासत” बताया। अस्पताल से वांगचुक ने युवाओं से संसद मार्च करने की अपील की। कई विपक्षी नेता जैसे उद्धव ठाकरे, योगेंद्र यादव आदि ने समर्थन दिया।
20 जुलाई, पुलिस ने हद पार कर दी
आज, 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन CJP ने सबसे बड़ा प्रदर्शन किया। सुबह से हजारों (कुछ रिपोर्टों में 20,000 से ज्यादा) युवा और अभिभावक जंतर-मंतर पर जमा हुए। वे संसद भवन तक मार्च करना चाहते थे। दिल्ली पुलिस ने इजाजत नहीं दी। रास्ते बैरिकेड से बंद कर दिए गए, मोबाइल इंटरनेट बंद किया गया और मेट्रो स्टेशन भी बंद रहे। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की तो पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। दोनों पक्षों के लोग घायल हुए। अभिजीत दिपके ने पुलिस कार्रवाई को “बर्बर” बताया। सरकार ने आखिरकार बैठक बुलाई, लेकिन CJP के तीन मुख्य मुद्दों पर कोई ठोस वादा नहीं हुआ। शाम तक धरना जारी रहा और CJP ने कहा – “यह शांतिपूर्ण protest तब तक नहीं रुकेगा जब तक प्रधान इस्तीफा नहीं देते।”
सरकार किस कवायद में जुटी है?
मोदी सरकार ने शुरुआत में आंदोलन को गंभीरता से नहीं लिया। शिक्षा मंत्री ने इसे “आतंकवादियों का B-टीम” बताया। सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक करने की कोशिश हुई। लेकिन बढ़ते दबाव में बैठक जरूर बुलाई गई। अभी तक कोई बड़ा फैसला नहीं हुआ है।
कहां-कहां असर दिख रहा है?
दिल्ली के अलावा मुंबई समेत कई शहरों में समर्थन प्रदर्शन हुए हैं। आंदोलन का सोशल मीडिया प्रभाव पूरे देश में है। छह लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं।
आंदोलन ने क्या हासिल किया?
मुख्य मांग – प्रधान का इस्तीफा – अभी पूरी नहीं हुई, लेकिन सरकार को बातचीत की मेज पर लाने में सफलता मिली।
युवाओं के मुद्दे राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गए। मोदी सरकार की छवि पर असर पड़ा है।
विश्लेषक योगेंद्र यादव इसे शिक्षा और रोजगार पर युवा लामबंदी की बड़ी उपलब्धि मानते हैं।
भविष्य की संभावनाएं क्या हैं?
आंदोलन का आगे का रुख सोनम वांगचुक की सेहत, सरकार की प्रतिक्रिया और युवाओं के गुस्से पर निर्भर करेगा। कुछ लोग इसे नेपाल-बांग्लादेश जैसे आंदोलनों से जोड़ रहे हैं, जहां युवाओं ने सरकारें बदलीं। लेकिन दिपके इसे शांतिपूर्ण और संवैधानिक सीमाओं में रहने वाला आंदोलन बताते हैं। आलोचक कहते हैं कि यह अवसरवादी प्रयास है। हालांकि, अगर बेरोजगारी और शिक्षा की समस्याएं बनी रहीं तो यह लंबा चल सकता है।
कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन दिखाता है कि छोटी सी न्यायिक टिप्पणी कैसे बड़े जन-आंदोलन में बदल सकती है। यह भारत के युवाओं की पीड़ा, शिक्षा व्यवस्था की खामियों और बेरोजगारी की सच्चाई को उजागर करता है। 20 जुलाई का मार्च इसकी ताकत का प्रमाण है। अब देखना होगा कि सरकार इस गुस्से को कैसे संभालती है। युवा कह रहे हैं – हम कॉकरोच हैं, हम मरते नहीं।