जंतर-मंतर से बीजेपी की विदाई का श्रीगणेश हो रहा है?
दिल्ली के जंतर मंतर पर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सैकड़ों प्रदर्शनकारी धरना दे रहे हैं।
दिल्ली के जंतर मंतर पर उमड़े प्रदर्शनकारी।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पिछले कई महीनों से राजनीतिक विवाद के केंद्र में बने हुए हैं। कांग्रेस और विपक्षी दलों का आरोप है कि उनके कार्यकाल में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली की, जिसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। फरवरी 2025 में उन्हें देश का मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था। उस समय भी राहुल गांधी ने उनके चयन के लिए सुझाए गए पांच नामों पर आपत्ति जताई थी। तब से लेकर अब तक कई मौकों पर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव की स्थिति बनी रही है।
वोट चोरी के आरोप से शुरू हुआ ताजा विवाद
इस विवाद की ताजा शुरुआत तब हुई जब राहुल गांधी ने कर्नाटक और महाराष्ट्र के मतदाता सूची से जुड़े आंकड़े पेश करते हुए वोट चोरी का दावा किया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आरोप नहीं बल्कि एक तथ्य है। इसके बाद राहुल गांधी ने प्रेजेंटेशन के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना साधा और सवाल उठाया कि चुनाव आयोग इन आरोपों की जांच क्यों नहीं कर रहा।
चुनाव आयोग ने जवाब में राहुल गांधी से शपथ पत्र देने की मांग की, जिस पर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई। ज्ञानेश कुमार ने इसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की, जिसमें विपक्षी दलों का कहना था कि उन्होंने सीधे तौर पर राहुल गांधी पर हमला किया। इस घटनाक्रम के बाद तीन पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों ने भी ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली पर सवाल उठाए और कहा कि किसी नेता से शपथ पत्र मांगना उचित नहीं है।
इसी दौरान बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी विवाद बढ़ा। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग एसआईआर अभियान की जल्दबाजी पर सवालों का जवाब देने के बजाय विपक्ष पर ही निशाना साध रहा है।
रामलीला मैदान में कांग्रेस की वोट चोर गद्दी छोड़ रैली
इसी सियासी माहौल के बीच कांग्रेस ने 14 दिसंबर 2025 को दिल्ली के रामलीला मैदान में वोट चोर गद्दी छोड़ के नाम से एक बड़ी रैली आयोजित की। इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने जनसभा को संबोधित किया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला।
रैली में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि BJP और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा कानून अपने फायदे के लिए बदला है। उन्होंने यह भी कहा कि यूपी के कुछ लोग हरियाणा में जाकर वोट डालते हैं, जिसे वे चुनावी गड़बड़ी का उदाहरण बताते हैं। प्रियंका गांधी ने भी रैली में कहा कि सरकार जनता के असली मुद्दों से भाग रही है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इसके बाद देशभर में विरोध मार्च का ऐलान किया और सीधे तौर पर ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग की। वेणुगोपाल का कहना था कि चुनाव आयोग के कुछ फैसले संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना लिए गए।
विपक्ष ने दो बार लाया महाभियोग प्रस्ताव
विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की भी कोशिश की। 12 मार्च 2026 को 193 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ पहला प्रस्ताव पेश किया गया, लेकिन राज्यसभा सभापति ने न्यायाधीश जांच अधिनियम 1968 की धारा 3 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
इसके बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि राज्यसभा के 73 विपक्षी सांसदों ने एक नया नोटिस राष्ट्रपति को भेजा है। जयराम रमेश ने कहा कि चुनाव आयोग अपने इतिहास में कभी इतना समझौतावादी नहीं रहा, जितना ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में हुआ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एग्जिट पोल को लेकर भी गड़बड़ियां हुई हैं और इसे एक रैकेट बताया।
जयराम रमेश ने अप्रैल 2026 में एक बयान में यह भी कहा कि लोकसभा के परिसीमन को जबरन लागू करने की कोशिश विपक्ष की एकजुटता के कारण विफल हुई है और अब प्रधानमंत्री को वही कदम उठाना चाहिए जिसकी मांग विपक्ष मार्च 2026 से लगातार कर रहा है।
राहुल गांधी ने लगाया BJP के लिए भर्ती का आरोप
विवाद में एक नया मोड़ तब आया जब राहुल गांधी ने केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के एक बयान का हवाला देते हुए दावा किया कि ज्ञानेश कुमार ने केंद्र सरकार में सेवारत आईएएस अधिकारी रहते हुए 2019 के चुनाव के दौरान BJP के लिए उम्मीदवार तैयार करने का काम किया था। राहुल गांधी ने केरल कांग्रेस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर रिपोस्ट करते हुए यह आरोप लगाया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
लोक जनशक्ति पार्टी नेता चिराग पासवान ने भी चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों पर बयान देते हुए ज्ञानेश कुमार से जवाब मांगा था। वहीं Cockroach Janata Party के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी ज्ञानेश कुमार पर तीखी टिप्पणी की थी।
BJP का पलटवार, ज्ञानेश कुमार को बताया सम्मान का हकदार
विपक्ष के आरोपों पर BJP लगातार पलटवार करती रही है। पार्टी नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कांग्रेस और राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि इसमें कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस अपनी घटती लोकप्रियता को वोट चोरी का नाम दे रही है।
SIR विवाद के बीच पश्चिम बंगाल BJP अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने तो ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण सम्मान दिए जाने की मांग तक कर दी। भट्टाचार्य ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ज्ञानेश कुमार का पूरा समर्थन करती है और शांतिपूर्ण बंगाल चुनाव कराने के लिए उनके योगदान को सम्मानित किया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग की संवैधानिक साख पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम को सिर्फ राजनीतिक खींचतान के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि यह देश की संवैधानिक संस्थाओं की साख और जनता के भरोसे से जुड़ा मुद्दा भी बन गया है। एक तरफ विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है, तो दूसरी तरफ सत्तारूढ़ दल का कहना है कि यह विपक्ष की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद अपनी चुनावी हार के लिए संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराना है।
चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी मामला पहुंच चुका है, जिसमें आगे चलकर केंद्र सरकार और न्यायपालिका के बीच टकराव की संभावना जताई जा रही है। यह मुद्दा आगामी 2029 के आम चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि विपक्ष का मानना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल आने वाले चुनावों की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकते हैं।
आगे क्या, जारी रहेगी सियासी तकरार
फिलहाल ज्ञानेश कुमार अपने पद पर बने हुए हैं और राज्यसभा सभापति द्वारा पहला महाभियोग प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद उनका कार्यकाल जारी है। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है और दूसरा नोटिस पहले ही दिया जा चुका है। वहीं सरकार और BJP का रुख यह है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उस पर उठाए जा रहे सवाल निराधार हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या विपक्ष का दूसरा महाभियोग प्रस्ताव संसद में पेश होता है, और क्या इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का कोई हस्तक्षेप सामने आता है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला जारी है और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर देश की राजनीति गरम बनी हुई है।