पाकिस्तान की सरकार किसकी कठपुतली है? एस जयशंकर ने बताया

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पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने बुरी तरह लताड़ा है।

S Jaishankar

UNGA में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बिना शरीफ का नाम लिए इस्लामाबाद को “आतंकवाद का बार-बार अभ्यासी” बताया और आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया।
जयशंकर ने कहा कि शरीफ ने आतंकवाद को “सामान्य बताने” और उसके नतीजों से “छूट का दावा” करने के लिए तर्क गढ़े, जबकि भारत ने अपनी आत्मरक्षा के अधिकार पर जोर दिया।
शरीफ के भाषण में क्या था
अपने संबोधन में शरीफ ने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन चले सैन्य टकराव का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान इस्लामाबाद ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत अपने “स्वाभाविक आत्मरक्षा के अधिकार” का इस्तेमाल किया और पाकिस्तानी सेना की उसकी प्रतिक्रिया के लिए सराहना की।
इस पर जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा, “कल आतंकवाद के एक बार-बार अभ्यासी ने इस सभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। आतंकवाद को सामान्य बताने और उसके नतीजों से छूट का दावा करने के लिए तर्क गढ़े गए। यह नहीं चलेगा। हम अपनी रक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करते रहेंगे।”
जयशंकर ने आगे कहा कि दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं रह सकते, और आतंकवाद फैलाने वाले को ही अपना रवैया बदलना होगा।
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकी ठिकानों पर हमले किए गए। यह सैन्य टकराव 10 मई को लागू हुए संघर्षविराम के साथ खत्म हुआ।
अपने भाषण में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी श्रेय दिया। शरीफ ने कहा कि ट्रंप का “समय पर हस्तक्षेप” उस निर्णायक मोड़ पर आया, जब दो परमाणु संपन्न पड़ोसी देश पूर्ण युद्ध के कगार पर खड़े थे। उन्होंने कहा कि अगर ट्रंप ने स्पष्ट सोच और कार्रवाई के साथ हस्तक्षेप न किया होता, तो पता नहीं कितनी तबाही हो सकती थी। शरीफ ने कहा कि दक्षिण एशिया को दोबारा ऐसी स्थिति में जाने से रोकना जरूरी है।
हालांकि नई दिल्ली लगातार यह कहता रहा है कि मई 2025 का संघर्षविराम भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी बातचीत से हुआ, जिसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी।
भारत ने इस्तेमाल किया राइट टू रिप्लाई
शरीफ के भाषण के बाद भारत ने अपने राइट ऑफ रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान को “कठपुतली शासन” करार दिया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने भारत और जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान की टिप्पणियों को सख्ती से खारिज किया। उन्होंने आतंकवाद, लोकतांत्रिक अधिकारों और अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को लेकर भी इस्लामाबाद के रिकॉर्ड पर निशाना साधा।
गहलोत ने कहा, “इस मुद्दे के केंद्र में पाकिस्तान का सीमा पार आतंकवाद फैलाने का लंबे समय से चला आ रहा तरीका है। हमने पिछले साल दिखा दिया कि आतंकवादियों के पास भागने और छिपने की कोई जगह नहीं होगी। आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा का अधिकार हम इस्तेमाल करते रहेंगे। पाकिस्तान के आतंकवाद के नतीजे होंगे।”
उन्होंने महासभा से कहा कि उन्हें भरोसा है कि यह सभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को उनकी असली शक्ल में पहचानेगी, न कि उस तरह जैसा उसका प्रतिनिधि झूठे तरीके से पेश करता है। गहलोत ने कहा कि झूठ को साल-दर-साल दोहराने से वह सच नहीं बन जाता, और पाकिस्तान के आतंकवाद, छल और दोहरेपन का फायदा न तो उसे मिलेगा और न ही दुनिया को।

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