प्रशांत किशोर बांकीपुर क्यों जीते? 4 वजहें समझिए
बांकीपुर विधानसभा में प्रशांत किशोर।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर की भारी मतों से जीत हुई है। आरजेडी और बीजेपी को मात देते हुए जनसुराज पार्टी ने तीसरे विकल्प के रूप में अपना स्थान सुनिश्चित कर लिया है। बांकीपुर सीट को बीजेपी के अभेद्य किले के रूप में देखा जाता रहा है, जिसे तोड़ना सहज नहीं था। अगर हम जनसुराज की जीत और भाजपा की हार के लिए चार बड़े कारणों की बात करें तो सबसे पहले हम व्यक्तिगत रूप से बात करेंगे जनसुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर के बारे में।
1. प्रशांत किशोर की रणनीति : प्रशांत किशोर एक अच्छे राजनीतिज्ञ हैं, अच्छे रणनीतिकार हैं। प्रशांत किशोर अपने पिछले दिनों में कई जाने – माने नेताओं को अपनी रणनीति से, बुद्धि से चुनावों में विजय दिला चुके हैं। व्यक्तिगत रूप से उनका व्यक्तित्व प्रभावी रहा है। यह भी एक मजबूत कारण है कि जनसुराज ने प्रभावी ढंग से जीत हासिल की है।
2. नितिन नवीन की अनुपस्थिति : अगर हम दूसरे कारण की बात करें तो वह होगा नितिन नवीन का अनुपस्थित होना। नितिन नवीन बांकीपुर सीट से लगातार चार बार जीत हासिल कर चुके हैं। पार्टी के अलावा भी नितिन नवीन का ख़ुद का भी एक प्रभाव रहा है इस सीट पर। या हम यूँ कहें कि नितिन नवीन का अनुभव भी पिछली जीतों में भागीदार रहा है। इस उपचुनाव में नितिन नवीन के स्थान पर नए चेहरे का आना भी इस हार का एक कारण है।
3. युवाओं का प्रशांत किशोर के प्रति विश्वास : प्रशांत किशोर के विचारों से अधिकतर युवा प्रभावित हुए हैं। युवा वोटर्स के बीच प्रशांत किशोर ने सकारात्मक छाप छोड़ा है। युवा सोच बदलाव चाहता है और इस बात को प्रशांत बखूबी समझते आए हैं। परिणामस्वरूप अधिकतर युवा प्रशांत किशोर के खेमे में आ गए और जनसुराज ने जीत हासिल की।
4. बीजेपी का अति आत्मविश्वास : बांकीपुर बीजेपी का क्षेत्र रही है, बीजेपी ये मानकर चल रही थी कि हमेशा की तरह जीत हमारे पक्ष में ही है। इस सीट को बीजेपी से नहीं छीना जा सकता है, चूँकि लगातार चार बार से नितिन नवीन ने इस सीट पर जीत हासिल की थी। और यही अति आत्मविश्वास, अति उत्साह भी बीजेपी के हार का प्रमुख कारण बनी; जिसके फलस्वरूप जनसुराज ने भाजपा को उसके गढ़ में मात देकर जीत हासिल की है।