नाना पाटेकर: ‘युगपुरुष’ जिसने छोड़ दी दुनिया
अभिनेता नाना पाटेकर का गोवा में हार्ट अटैक से निधन, गुरुवार शाम पुणे के फार्महाउस पर राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार।
दिग्गज फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर ने अब दुनिया को अलविदा कह दिया है।
हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह गोवा में निधन हो गया। वे 75 साल के थे। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने स्थानीय मीडिया को निधन की पुष्टि की। डॉक्टरों ने हार्ट अटैक को मौत की वजह बताया है। नाना पाटेकर तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुके थे और उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में गिना जाता है।
उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को पुणे जिले में उनके फार्महाउस पर होगा। यह फार्महाउस पुणे शहर के बाहरी इलाके डोंजे में है। उनके नाम फाउंडेशन के सीईओ गणेश थोरात के मुताबिक पार्थिव देह शाम करीब 5 बजे तक पुणे लाई जाएगी। इसके बाद प्रशंसकों के अंतिम दर्शन के लिए रखी जाएगी। महाराष्ट्र सरकार ने अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ करने का फैसला किया है।
गोवा में सुबह तड़के बिगड़ी तबीयत
नाना पाटेकर गुरुवार तड़के गोवा में डोना पावला स्थित अपने घर पर थे। बताया गया है कि वे घर पर बेहोश मिले। उन्हें तुरंत मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें होश में लाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
सुबह करीब 5 बजकर 20 मिनट पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने मौत की वजह हार्ट अटैक बताई है। उनके निधन की खबर फैलते ही फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति से जुड़े लोगों ने शोक जताना शुरू कर दिया।
पुणे में होगा अंतिम संस्कार, दर्शन की व्यवस्था
नाना पाटेकर के सामाजिक संगठन के प्रतिनिधि ने बताया कि अंतिम संस्कार गुरुवार को ही होगा। गणेश थोरात ने कहा कि पार्थिव देह शाम करीब 5 बजे तक लाई जाएगी। इसके बाद अंतिम दर्शन के लिए रखी जाएगी। अंतिम संस्कार की रस्में फार्महाउस परिसर में ही पूरी की जाएंगी।
गणेश थोरात नाम फाउंडेशन के सीईओ हैं। यह संस्था पानी बचाने के काम से जुड़ी है। उन्होंने यह भी बताया कि अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
राजकीय सम्मान का ऐलान
महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने गुरुवार सुबह इसकी घोषणा की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मराठी नाटकों के साथ मराठी और हिंदी सिनेमा में नाना पाटेकर के बेमिसाल योगदान को देखते हुए उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ करने का फैसला लिया गया है।
मीडिया से बात करते हुए शेलार ने कहा कि नाना पाटेकर का जाना कला जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा कि अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर नाना ने मराठी रंगमंच, मराठी सिनेमा और हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। शेलार ने अपनी ओर से, महाराष्ट्र सरकार की ओर से और सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से श्रद्धांजलि दी।
उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई मुख्यमंत्रियों ने भी श्रद्धांजलि दी। भारतीय सिनेमा के कई कलाकारों ने भी शोक जताया।
विश्वनाथ पाटेकर से नाना पाटेकर तक
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को एक मराठी परिवार में हुआ था। उनका जन्मस्थान रायगढ़ जिले का मुरुड-जंजीरा बताया जाता है। उन्होंने मुंबई के सर जे.जे. इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट से पढ़ाई की थी।
उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता को नाटक बहुत पसंद थे। पिता ही उन्हें नाटक देखने के लिए प्रेरित करते थे। इसी से नाना के मन में अभिनय के लिए लगाव पैदा हुआ। उनका पहला नाटक विजया मेहता ने निर्देशित किया था। नाना जब 28 साल के थे, तब उनके पिता का हार्ट अटैक से निधन हो गया था।
1978 में की फिल्मी करियर की शुरुआत
नाना पाटेकर ने 1978 में आई फिल्म गमन से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इसमें उन्होंने वासु का किरदार निभाया था। इसके बाद उन्होंने कुछ मराठी फिल्मों और चुनिंदा हिंदी फिल्मों में काम किया।
1980 के दशक के शुरुआती सालों में वे मराठी सिनेमा में सक्रिय रहे। उन्होंने सिंहासन, राघू मैना और गड जेजुरी जेजुरी जैसी फिल्मों में काम किया। 1983 में राघू मैना के लिए और 1986 में गड जेजुरी जेजुरी के लिए उन्हें महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया।
हिंदी में उन्होंने आज की आवाज, अंकुश, प्रतिघात, अंधा युद्ध, मोहरे और अवाम जैसी फिल्मों में छोटे-बड़े किरदार निभाए। अंकुश में उन्होंने रवींद्र केलकर का किरदार निभाया था। अंधा युद्ध के लिए उन्हें पहली बार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकन मिला।
1986 में वे ब्रिटिश टीवी सीरीज लॉर्ड माउंटबैटन: द लास्ट वायसराय में भी दिखे। इसमें उन्होंने नाथूराम गोडसे का किरदार निभाया था।
सलाम बॉम्बे और परिंदा ने दी पहचान
1988 में मीरा नायर की फिल्म सलाम बॉम्बे में नाना पाटेकर ने बाबा का किरदार निभाया। उनके काम की खूब तारीफ हुई। यह फिल्म ऑस्कर के लिए नामांकित हुई थी।
1989 में आई परिंदा उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुई। इसमें उन्होंने अन्ना सेठ नाम के गैंगस्टर का किरदार निभाया। इस भूमिका के लिए उन्हें पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। वह सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार था। उन्हें इसी भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पहला फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला।
प्रहार से निर्देशन में रखा कदम
1991 में नाना पाटेकर ने फिल्म प्रहार: द फाइनल अटैक से निर्देशन में कदम रखा। इसमें उन्होंने मेजर चौहान का किरदार निभाया। फिल्म में माधुरी दीक्षित भी थीं। उन्होंने इस फिल्म की कहानी भी लिखी थी।
इस किरदार के लिए नाना ने भारतीय सेना के अधिकारी की ट्रेनिंग ली थी। उन्होंने तीन महीने की ट्रेनिंग की थी। इस दौरान उन्होंने जनरल वी.के. सिंह के साथ काम किया, जो उस समय लेफ्टिनेंट कर्नल थे। जनरल वी.के. सिंह ने फिल्म में एक छोटी भूमिका भी निभाई थी।
1990 के दशक में एक के बाद एक यादगार किरदार
1992 में नाना पाटेकर की कई फिल्में आईं। राजू बन गया जेंटलमैन में वे शाहरुख खान, जूही चावला और अमृता सिंह के साथ दिखे। अंगार में उन्होंने मजीद खान का किरदार निभाया। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का पहला फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
1993 में आई तिरंगा में वे दिग्गज अभिनेता राज कुमार के साथ नजर आए। इसमें उन्होंने शिवाजीराव वागले का किरदार निभाया। राजू बन गया जेंटलमैन और तिरंगा, दोनों के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकन मिला।
1994 की फिल्म क्रांतिवीर में उन्होंने प्रताप नारायण तिलक की भूमिका निभाई। इस किरदार के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया। साथ ही उन्हें फिल्मफेयर और स्क्रीन अवॉर्ड में भी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला।
उसी साल उन्होंने बच्चों की फिल्म अभय में भूत का किरदार निभाया। 1995 में वे हम दोनों में ऋषि कपूर के साथ दिखे।
1996 में उनकी दो फिल्में खास चर्चा में रहीं। अग्नि साक्षी में उन्होंने एक क्रूर पति का किरदार निभाया। इसके लिए उन्हें दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। खामोशी: द म्यूजिकल में उन्होंने मनीषा कोईराला के मूक-बधिर पिता जोसेफ ब्रगांजा का किरदार निभाया। इन दोनों फिल्मों के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकन मिला।
इसके बाद 1997 में वे गुलाम-ए-मुस्तफा में गैंगस्टर और यशवंत में ईमानदार लेकिन अपनी मर्जी से चलने वाले पुलिस अफसर के किरदार में दिखे। 1998 में वजूद में उन्होंने सिजोफ्रेनिया से जूझते व्यक्ति की भूमिका निभाई। इसी साल युगपुरुष भी आई।
1999 में कोहराम में उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ काम किया। इसमें वे सेना के खुफिया अधिकारी बने थे, जो अमिताभ बच्चन के किरदार का पीछा करता है। उसी साल हू तू तू भी आई।
नई सदी में खलनायक और पुलिस अफसर बनकर छाए
साल 2000 में नाना पाटेकर तरकीब में सीबीआई इंस्पेक्टर बने। इसके बाद करीब एक साल के अंतराल के बाद उन्होंने 2002 में शक्ति: द पावर से वापसी की। इसमें उन्होंने बेहद हिंसक पिता का किरदार निभाया। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकन मिला।
2003 में वे भूत, डरना मना है और आंच जैसी फिल्मों में नजर आए। 2004 में अब तक छप्पन में उन्होंने एनकाउंटर स्पेशलिस्ट पुलिस अफसर साधु आगाशे का किरदार निभाया। इस फिल्म का एक सीक्वल 2015 में अब तक छप्पन 2 के नाम से आया।
2005 की फिल्म अपहरण में उन्होंने तबरेज आलम का किरदार निभाया। इसके लिए उन्हें दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्मफेयर पुरस्कार और स्क्रीन अवॉर्ड मिला।
2006 में आई टैक्सी नंबर 9211 में उन्होंने टैक्सी ड्राइवर का किरदार निभाया। फिल्म में उनके साथ जॉन अब्राहम थे। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और दोनों कलाकारों की जोड़ी की तारीफ हुई।
वेलकम से राजनीति तक, हर रंग में दिखे
साल 2007 नाना पाटेकर के लिए सफल रहा। इस साल उन्होंने कई हल्के-फुल्के किरदार निभाए। वेलकम में अनिल कपूर के साथ उनका काम बेहद पसंद किया गया। इसमें उन्होंने मुंबई के ताकतवर डॉन उदय शेट्टी का किरदार निभाया था, जो कभी फिल्मों में अभिनेता बनना चाहता था। 2015 में आई वेलकम बैक में वे फिर अनिल कपूर के साथ दिखे। यह फिल्म सफल रही।
2009 में वे संगीत सिवन की फिल्म एक में नजर आए। 2008 में उन्होंने तमिल सिनेमा में भी कदम रखा। वे द्विभाषी फिल्म बोम्मलाट्टम में दिखे।
2010 में उन्होंने पाठशाला में स्कूल के प्रिंसिपल का किरदार निभाया। इसी साल प्रकाश झा की राजनीतिक फिल्म राजनीति में उन्होंने ब्रज गोपाल की भूमिका निभाई। इस किरदार के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए पांचवां नामांकन मिला।
मराठी सिनेमा में नटसम्राट बनी बड़ी पहचान
2011 में नाना पाटेकर ने शागिर्द और मराठी फिल्म देऊळ में काम किया। 2013 में रामगोपाल वर्मा की फिल्म द अटैक्स ऑफ 26/11 में उन्होंने 2008 के मुंबई हमले के समय के संयुक्त पुलिस आयुक्त राकेश मारिया का किरदार निभाया।
2014 में वे मराठी फिल्म डॉ. प्रकाश बाबा आमटे: द रियल हीरो में नजर आए। इसमें उन्होंने डॉ. प्रकाश आमटे की भूमिका निभाई। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर मराठी पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया।
2016 में आई मराठी फिल्म नटसम्राट में उन्होंने गणपतराव रामचंद्र बेलवलकर यानी अप्पा का किरदार निभाया। यह फिल्म एक रिटायर्ड रंगमंच कलाकार की कहानी है। फिल्म को समीक्षकों की तारीफ मिली और कमाई के लिहाज से भी यह बड़ी सफल रही। इसके लिए उन्हें दोबारा फिल्मफेयर मराठी में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। फिल्म के निर्माता भी वे खुद थे।
इसी साल उन्होंने हिंदी में बनी द जंगल बुक में शेर खान को अपनी आवाज दी। 2018 में उन्होंने मराठी फिल्म आपला माणूस में भी काम किया, जिसके वे सह-निर्माता भी थे।
हाल के सालों में भी सक्रिय रहे
2018 में नाना पाटेकर ने रजनीकांत की तमिल फिल्म काला में सहायक भूमिका निभाई। इसमें उन्होंने हरिदेव अभ्यंकर का किरदार निभाया। 2020 में वे इट्स माय लाइफ में और 2022 में तड़का में दिखे।
2023 में उन्होंने विवेक अग्निहोत्री की फिल्म द वैक्सीन वॉर की अगुवाई की। यह फिल्म कोविड-19 महामारी के दौरान भारत में कोवैक्सीन के विकास पर बनी थी। इसमें उन्होंने डॉ. बलराम भार्गव का किरदार निभाया। टाइम्स ऑफ इंडिया की समीक्षक रेणुका व्यवहारे ने उनके अभिनय को शानदार बताया। उसी साल उन्होंने सनी देओल की गदर 2 में नैरेटर के तौर पर आवाज दी।
2024 में वे मराठी फिल्म ओले आले और हिंदी फिल्म वनवास में नजर आए। 2025 में उन्होंने मल्टीस्टारर कॉमेडी थ्रिलर हाउसफुल 5 में सहायक भूमिका निभाई। 2026 में वे फिल्म ओ रोमियो और सुबेदार में दिखे। सुबेदार में उनकी विशेष उपस्थिति थी। इसी साल वे टीवी सीरीज संकल्प में भी नजर आए।
उन्होंने कुछ फिल्मों में गाने भी गाए। उन्होंने यशवंत, वजूद और आंच में प्लेबैक सिंगिंग की।
कितने पुरस्कार जीते
नाना पाटेकर ने अपने करियर में तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते। पहला 1989 की परिंदा के लिए, दूसरा 1994 की क्रांतिवीर के लिए और तीसरा 1996 की अग्नि साक्षी के लिए मिला। इनमें क्रांतिवीर के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया, जबकि बाकी दो पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के थे।
उन्होंने चार फिल्मफेयर पुरस्कार जीते। ये पुरस्कार परिंदा, अंगार, क्रांतिवीर और अपहरण के लिए मिले। वे उन गिने-चुने अभिनेताओं में थे, जिन्होंने फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता और सर्वश्रेष्ठ खलनायक, तीनों श्रेणियों में पुरस्कार जीते। इरफान खान भी इस सूची में शामिल थे।
इसके अलावा उन्हें दो महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार और दो फिल्मफेयर मराठी पुरस्कार मिले। 2013 में सिनेमा और कला में योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उसी साल महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें राज कपूर विशेष योगदान पुरस्कार भी दिया।
सेना से भी रहा गहरा नाता
नाना पाटेकर का भारतीय सेना से भी जुड़ाव रहा। वे 1988 में टेरिटोरियल आर्मी में कैप्टन के तौर पर शामिल हुए थे। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट में मेजर के तौर पर सेवा दी।
वे 2013 में टेरिटोरियल आर्मी से लेफ्टिनेंट कर्नल के पद से रिटायर हुए।
समाजसेवा के लिए भी रहे चर्चित
नाना पाटेकर अपनी सादगी भरी जीवनशैली और समाजसेवा के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने अनुभूति नाम की चैरिटी संस्था के जरिए बिहार के बाढ़ प्रभावित गांवों के दोबारा निर्माण के लिए पैसे दिए थे। पाठशाला फिल्म की पूरी फीस उन्होंने पांच अलग-अलग चैरिटी संस्थाओं को दान कर दी थी।
राज कपूर पुरस्कार के साथ मिली 10 लाख रुपये की राशि उन्होंने महाराष्ट्र में सूखा राहत के कामों के लिए दान कर दी थी।
सितंबर 2015 में उन्होंने मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ नाम फाउंडेशन की स्थापना की। यह संस्था महाराष्ट्र में सूखे से जूझ रहे किसानों की मदद करती है। उन्होंने आईकेयर आईसपोर्ट हैशटैग के साथ ट्विटर पर अभियान चलाकर भी सूखा पीड़ितों के लिए धन जुटाया था।
सूखे के कारण कर्ज में डूबकर आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों की उन्होंने आर्थिक मदद की। अगस्त 2015 में उन्होंने विदर्भ के 62 परिवारों को 15-15 हजार रुपये के चेक बांटे। सितंबर 2015 में मराठवाड़ा के लातूर और उस्मानाबाद जिलों के 113 परिवारों को भी इतनी ही राशि के चेक दिए।
निजी जीवन
नाना पाटेकर की शादी 1978 में नीलकांति से हुई थी। उनके दो बेटे हुए, दुर्वास और मल्हार। दुर्वास का दो साल की उम्र में बीमारी से निधन हो गया था। उनके दो भाई थे, अशोक और दिलीप पाटेकर। उनकी मां निर्मला पाटेकर उनके साथ रहती थीं। 29 जनवरी 2019 को 99 साल की उम्र में उनका निधन हुआ।
नाना पाटेकर पहले बहुत ज्यादा धूम्रपान करते थे। उन्होंने 56 साल की उम्र में सिगरेट छोड़ दी थी।
करियर से जुड़ा एक विवाद
नाना पाटेकर का करियर एक विवाद से भी जुड़ा रहा। 2008 में अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने फिल्म हॉर्न ओके प्लीज के सेट पर उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उन्होंने सिंटा में शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह आरोप 2013 में एक इंटरव्यू में और 2018 में फिर दोहराया गया।
2018 के आखिर में सिंटा ने तनुश्री दत्ता से माफी मांगी। संस्था ने माना कि 2008 में यौन उत्पीड़न की मुख्य शिकायत पर ध्यान नहीं दिया गया था। हालांकि संस्था ने कहा कि मामला तीन साल से ज्यादा पुराना होने के कारण उसे दोबारा नहीं खोला जा सकता।
1 अक्टूबर 2018 की देर रात ओशिवारा पुलिस थाने में तनुश्री दत्ता की शिकायत पर नाना पाटेकर और तीन अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इन पर छेड़छाड़ और अश्लीलता के आरोप लगे थे। तनुश्री दत्ता के आरोपों के बाद बॉलीवुड में मीटू आंदोलन ने जोर पकड़ा था।
फिल्म जगत और प्रशंसकों में शोक
नाना पाटेकर के निधन से हिंदी और मराठी सिनेमा में शोक की लहर है। रंगमंच से सिनेमा तक उन्होंने चार दशक से ज्यादा लंबा सफर तय किया। वे खलनायक, पुलिस अफसर, गैंगस्टर, पिता, शिक्षक और रंगमंच कलाकार जैसे कई किरदारों में दिखे।
शाम को उनकी पार्थिव देह पुणे लाई जाएगी। प्रशंसक फार्महाउस पर उन्हें अंतिम विदाई दे सकेंगे। इसके बाद राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।