अमिताभ बच्चन कौन हैं, उनकी कौन सी फिल्में देख सकते हैं?
पांच दशक से बॉलीवुड पर राज करने वाले अमिताभ बच्चन के बचपन, संघर्ष और सफलता की पूरी दास्तान।
बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन। तस्वीर उन्हीं के फेसबुक अकाउंट से ली गई है।
भारतीय सिनेमा के इतिहास में शायद ही कोई नाम अमिताभ बच्चन जितना बड़ा और स्थायी असर छोड़ पाया हो। पांच दशक से भी लंबे करियर में उन्होंने न सिर्फ फिल्मों में अपनी अमिट छाप छोड़ी, बल्कि टेलीविजन और सामाजिक जीवन में भी एक अलग पहचान बनाई। आइए जानते हैं इलाहाबाद के एक साधारण परिवार में जन्मे अमिताभ बच्चन के बॉलीवुड के ‘शहंशाह’ बनने तक के पूरे सफर की कहानी।
बचपन और परिवार
अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में हुआ था। उनके पिता हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य के बड़े कवि थे, जिनकी रचनाओं को आज भी बड़े सम्मान से पढ़ा जाता है। उनकी मां तेजी बच्चन एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं, जिनका ताल्लुक पंजाब के एक सिख परिवार से था। अमिताभ बच्चन का शुरुआती नाम ‘इंकलाब’ रखा गया था, जो उस समय की आजादी की लड़ाई से प्रेरित था। बाद में उनके पिता ने उनका नाम बदलकर अमिताभ रख दिया, जिसका मतलब होता है ‘वह रोशनी जो कभी खत्म नहीं होती’।
बच्चन परिवार में साहित्यिक माहौल होने की वजह से अमिताभ बच्चन का बचपन से ही किताबों और शब्दों से गहरा नाता रहा। उनके परिवार में एक छोटे भाई अजिताभ बच्चन भी हैं। अमिताभ बच्चन का बचपन इलाहाबाद में ही बीता, जहां उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की।
शिक्षा और शुरुआती जीवन
अमिताभ बच्चन ने अपनी स्कूली शिक्षा इलाहाबाद के ज्ञान प्रबोधिनी और बॉयज हाई स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने नैनीताल के शेरवुड कॉलेज से आगे की पढ़ाई की। स्नातक की पढ़ाई के लिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में दाखिला लिया, जहां से उन्होंने विज्ञान विषय में डिग्री हासिल की।
पढ़ाई के दौरान अमिताभ बच्चन का रुझान नाटकों और मंच पर प्रस्तुति देने की तरफ बढ़ने लगा था। कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने अपनी गहरी और भारी आवाज की वजह से पहचान बनानी शुरू कर दी थी, जो आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई।
करियर की शुरुआत से पहले का संघर्ष
पढ़ाई पूरी करने के बाद अमिताभ बच्चन ने कोलकाता की एक शिपिंग कंपनी में नौकरी शुरू की। इस दौरान वे कंपनी के एजेंट के तौर पर काम करते थे। हालांकि उनके मन में हमेशा से अभिनय के प्रति एक गहरी दिलचस्पी थी। उस दौर में रेडियो पर भी उन्होंने अपनी आवाज को आजमाने की कोशिश की थी, लेकिन कहा जाता है कि उनकी भारी आवाज की वजह से उन्हें आकाशवाणी में नौकरी नहीं मिल पाई थी। यह वाकया बाद के सालों में एक दिलचस्प किस्से के तौर पर याद किया जाता रहा है, क्योंकि यही आवाज आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।
नौकरी छोड़कर अमिताभ बच्चन ने फिल्मी करियर बनाने का फैसला किया और मुंबई का रुख किया। शुरुआती दिनों में उन्हें कई संघर्षों का सामना करना पड़ा और कई ऑडिशन में असफलता भी मिली।
फिल्मी करियर की शुरुआत
अमिताभ बच्चन ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साल 1969 में आई फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ से की। इस फिल्म का निर्देशन ख्वाजा अहमद अब्बास ने किया था। इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन को सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला। हालांकि इसके बाद की कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा कामयाब नहीं रहीं।
साल 1971 में आई फिल्म ‘आनंद’ में अमिताभ बच्चन ने राजेश खन्ना के साथ एक अहम भूमिका निभाई, जिसे काफी सराहा गया। इस फिल्म ने उन्हें एक गंभीर अभिनेता के तौर पर पहचान दिलाई। इसके बाद भी शुरुआती सालों में उनके करियर में उतार-चढ़ाव बना रहा।
एंग्री यंग मैन की छवि और बड़ी सफलता
अमिताभ बच्चन के करियर में सबसे बड़ा मोड़ साल 1973 में आई फिल्म ‘जंजीर’ से आया। इस फिल्म में उन्होंने एक ईमानदार लेकिन गुस्सैल पुलिस अफसर की भूमिका निभाई, जिसने दर्शकों के बीच उन्हें तुरंत लोकप्रिय बना दिया। इसी फिल्म से उन्हें हिंदी सिनेमा में ‘एंग्री यंग मैन’ की उपाधि मिली, जो आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी।
इसके बाद के सालों में अमिताभ बच्चन ने कई बड़ी और कामयाब फिल्मों में काम किया। साल 1975 में आई फिल्म ‘दीवार’ और ‘शोले’ ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सितारों की कतार में खड़ा कर दिया। ‘शोले’ आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में गिनी जाती है और इसमें उनका किरदार ‘जय’ काफी पसंद किया गया।
इसके बाद के दशक में अमिताभ बच्चन ने ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘डॉन’, ‘त्रिशूल’, ‘काला पत्थर’, ‘कालिया’, ‘शक्ति’, ‘शराबी’ और ‘नमक हलाल’ जैसी कई बड़ी हिट फिल्में दीं। इन फिल्मों ने उन्हें उस दौर का सबसे बड़ा और सबसे व्यस्त अभिनेता बना दिया।
राजनीति में कदम और वापसी
अमिताभ बच्चन ने 1984 में राजनीति में भी कदम रखा और इलाहाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। उन्होंने भारी बहुमत से यह चुनाव जीता, लेकिन कुछ समय बाद ही राजनीति से किनारा कर लिया और वापस फिल्मी दुनिया में लौट आए।
1980 के दशक के आखिर में फिल्म ‘कूली’ की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन को एक गंभीर दुर्घटना का सामना करना पड़ा, जिसमें वे बुरी तरह घायल हो गए थे। इस हादसे ने पूरे देश को चिंता में डाल दिया था और लाखों लोगों ने उनकी सलामती के लिए दुआएं मांगी थीं। लंबे इलाज के बाद वे फिर से फिल्मों में सक्रिय हुए।
करियर में ठहराव और दूसरी पारी
1990 के दशक में अमिताभ बच्चन के करियर में कुछ ठहराव देखने को मिला और कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कमजोर साबित हुईं। इसी दौर में उन्होंने अपनी खुद की प्रोडक्शन कंपनी ‘अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ यानी एबीसीएल भी शुरू की, जिसे कुछ समय बाद आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
हालांकि साल 2000 के आसपास अमिताभ बच्चन के करियर में एक नई शुरुआत देखने को मिली। इस दौर में उन्होंने ‘मोहब्बतें’, ‘कभी खुशी कभी गम’ और ‘बागबान’ जैसी फिल्मों में एक परिपक्व और गरिमामय किरदार निभाना शुरू किया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया।
कौन बनेगा करोड़पति और छोटे पर्दे पर सफलता
साल 2000 में अमिताभ बच्चन ने टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की मेजबानी शुरू की। इस शो ने उन्हें छोटे पर्दे पर भी उतनी ही बड़ी पहचान दिलाई, जितनी उन्हें फिल्मों में मिली थी। उनकी बातचीत का अंदाज, सवाल पूछने का तरीका और प्रतिभागियों के साथ उनका व्यवहार इस शो की बड़ी वजह बना, जिसने इसे दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया। आज भी वे इस शो की मेजबानी कर रहे हैं और इसका 18वां सीजन अगस्त 2026 में शुरू होने जा रहा है।
अभिनय में नए प्रयोग
अपने करियर के तीसरे दशक में अमिताभ बच्चन ने खुद को एक बार फिर नए अंदाज में ढाला। उन्होंने ‘ब्लैक’, ‘पा’, ‘पीकू’, ‘पिंक’ और ‘पीकू’ जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के जटिल और संवेदनशील किरदार निभाए। इन फिल्मों ने साबित किया कि वे सिर्फ एक्शन हीरो तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर तरह के किरदार में ढलने की क्षमता रखते हैं।
इसके अलावा उन्होंने हॉलीवुड फिल्म ‘द ग्रेट गैट्सबी’ में भी एक अहम भूमिका निभाई, जो उनके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनने का एक अहम पड़ाव माना जाता है।
पुरस्कार और सम्मान
अमिताभ बच्चन को उनके योगदान के लिए भारत सरकार की तरफ से कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण जैसे नागरिक सम्मानों से नवाजा गया है। इसके अलावा उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें कई बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिल चुके हैं, जो उनके लंबे और शानदार करियर की गवाही देते हैं।
निजी जीवन
अमिताभ बच्चन ने जून 1973 में अभिनेत्री जया भादुड़ी से शादी की थी। उनके दो बच्चे हैं, बेटे अभिषेक बच्चन और बेटी श्वेता बच्चन नंदा। अभिषेक बच्चन भी बॉलीवुड में एक जाना-माना अभिनेता है और उनकी शादी अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन से हुई है। बच्चन परिवार की पोती आराध्या बच्चन भी अक्सर सुर्खियों में रहती हैं।
बच्चन परिवार मुंबई के जुहू इलाके में अपने घर ‘जलसा’ में रहता है, जो सालों से फैंस के बीच एक खास ठिकाना बना हुआ है। हर रविवार को अमिताभ बच्चन अपने घर के बाहर फैंस से मिलने के लिए आते हैं, जो उनके फैंस के बीच एक खास परंपरा बन चुकी है।
डिजिटल दुनिया में सक्रियता
अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया और ब्लॉगिंग में भी काफी सक्रिय रहते हैं। वे अपने ब्लॉग के जरिए रोजाना अपने विचार और अनुभव फैंस के साथ साझा करते हैं। इसके अलावा वे ट्विटर यानी एक्स पर भी लाखों फॉलोअर्स के साथ काफी सक्रिय रहते हैं। हाल के सालों में उन्होंने कई बार अपने स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी भी अपने ब्लॉग के जरिए फैंस के साथ साझा की है, जिस पर फैंस ने भारी दिलचस्पी दिखाई।
आज भी सक्रिय करियर
83 साल की उम्र में भी अमिताभ बच्चन फिल्मों और टेलीविजन दोनों में पूरी तरह सक्रिय हैं। हाल ही में वे ‘कल्कि 2898 एडी’ के अगले भाग की शूटिंग में व्यस्त रहे, जिसमें कमल हासन, प्रभास, दीपिका पादुकोण और दिशा पाटनी जैसे बड़े कलाकार भी शामिल हैं। यह फिल्म एक पौराणिक विज्ञान-कथा पर आधारित है।
इसके अलावा वे कई बार सार्वजनिक कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों में भी नजर आते रहते हैं। हाल ही में वे मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुए थे, जहां भारत की विश्व कप विजेता टीमों को सम्मानित किया गया था।
इलाहाबाद के एक साहित्यिक परिवार में जन्मे अमिताभ बच्चन का यह सफर संघर्ष, मेहनत और लगातार खुद को नए सिरे से गढ़ने की मिसाल है। एक असफल रेडियो ऑडिशन से लेकर बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारे बनने तक, उन्होंने हर दौर में खुद को नए रूप में ढाला। आज भी वे भारतीय सिनेमा और टेलीविजन में उतनी ही सक्रियता और ऊर्जा के साथ काम कर रहे हैं, जितनी उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में दिखाई थी। यही वजह है कि पांच दशक बाद भी अमिताभ बच्चन भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित और चहेते कलाकारों में शुमार होते हैं।