TMC में फूट और चुनाव आयोग का फैसला, क्या है ममता बनर्जी का राजनीतिक भविष्य?

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ममता बनर्जी इस राजनीति संकट से उबरेंगी या डूबेंगी, यह देखने वाली बात होगी।

Mamata Banerjee

तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी। तस्वीर उनके फेसबुक पेज से ली गई है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा से हार के बाद ममता बनर्जी का चौथी बार मुख्यमंत्री बनने का प्रयास खत्म हो गया। इसके बाद 2026 के चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में बड़ी टूट हुई। अब पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के फैसले ने ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य को लेकर बहस तेज कर दी है।

चुनाव आयोग का फैसला

चुनाव आयोग ने 17 सितंबर की रात अंतरिम आदेश जारी कर दोनों गुटों को पार्टी का नाम और ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया। यह रोक नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा उपचुनाव के लिए है।

18 सितंबर को ममता बनर्जी के गुट को ‘मामता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ चुनाव चिह्न मिला। प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिह्न दिया गया। ममता बनर्जी ने आयोग के आदेश पर आपत्ति जताई थी। राहुल गांधी और के.सी. वेणुगोपाल समेत कांग्रेस नेताओं ने भी फैसले पर सवाल उठाए हैं।

उपचुनाव की स्थिति

दोनों सीटों पर मतदान 6 अक्टूबर को और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के छोड़ने से खाली हुई, जिन्होंने भबानीपुर सीट बरकरार रखी, जहां उन्होंने ममता बनर्जी को हराया था।

ममता गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान को उतारा था, लेकिन उन्होंने नामांकन वापस ले लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद आया। दोनों की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसकी प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।

इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। पुलिस ने मिलन को 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों में गिरफ्तार कर लिया। कांग्रेस और ममता गुट ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया, जबकि भाजपा और पुलिस ने आरोप खारिज किए।

रेजिनगर में उम्मीदवार रबिउल आलम चौधरी ने नामांकन वापस लेने का फैसला बदल दिया। उनके मुताबिक, ममता बनर्जी से बात करने के बाद उन्होंने चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।

राजनीतिक भविष्य पर क्या कहते हैं जानकार

एक विश्लेषण के मुताबिक, ममता बनर्जी के लिए वापसी का रास्ता राष्ट्रीय विपक्षी राजनीति से होकर जाता है, राज्य प्रशासन से नहीं। हार के बाद उन्होंने इस्तीफा देने से इनकार किया था और INDIA गठबंधन को मजबूत करने की बात कही थी।

राजनीतिक विश्लेषक सुमंत्र बोस का आकलन इससे अलग है। उनके मुताबिक, मई 2026 के बाद से ममता बनर्जी के हकीकत से कटे रहने के कारण उनके साथी अब अपना राजनीतिक भविष्य कहीं और तलाश रहे हैं। यह उनकी व्यक्तिगत राय है।

आगे क्या?

6 अक्टूबर के उपचुनाव नई पहचान के साथ लड़ रहे ममता गुट के लिए पहला बड़ा चुनावी इम्तिहान माने जा रहे हैं। नतीजे 9 अक्टूबर को आएंगे।

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